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मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट चुनाव : 93 फीसदी लोगों ने किया मतदान, हार-जीत को लेकर लगे दांव…

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० मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट चुनाव के प्रचार बाद आज शाम 4 बजे तक मतदान के साथ संपन्न हुआ
० पुलिस की मौजूदगी में आदिवासी समाज ने किया उग्र प्रदर्शन, पुलिस अलर्ट पर रही


डोंगरगढ़ (दावा)। धर्मनगरी डोंगरगढ़ में 15 दिन से चल रहे मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट चुनाव के प्रचार बाद आज शाम 4 बजे तक मतदान के साथ संपन्न हुआ। रविवार की सुबह 7 बजे से 8 घंटे तक तीनों श्रेणी के 2943 मतदाताओं में से 2760 मतदाताओं ने मतदान किया। देखा जाए तो पिछले कई वर्षों से चले आ रहे इस धर्मार्थ चुनाव पहली बार 93 प्रतिशत मतदान हुआ है। जिसको लेकर भी इस धार्मिक चुनाव को लेकर समीकरण बैठाना दोनों ही पेनलों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इस बार तीनों ही श्रेणी में मनोज अग्रवाल सेवादल पैनल का पडला भारी होने की चर्चा ज्यादा सुनने को मिली। जबकि भैय्याजी पेनल, नारायण अग्रवाल पेनल भी अपनी जीत का दावा करते नजर आए। संरक्षण श्रेणी में 522 मतदाताओं में 491 मत, आजीवन श्रेणी में 884 मतदाताओं में 804 मत और साधारण श्रेणी में 1537 में 1465 मतदाताओं ने मतदान किया। बताया जा रहा है कि आजीवन श्रेणी में सेवा दल का पडला भारी है। साधारण श्रेणी में सेवा दल के साथ-साथ निर्दलीय ने भी दमखम दिखाया है। जबकि संरक्षण श्रेणी में कांटे की टक्कर होनी बताई जा रही है। कल प्रात: सुबह 7 बजे से शुरू होने वाली मतगणना को लेकर शहर में जीत-हार को लेकर जमकर दांव लगने की भी खबर सामने आई है। देखा जाए तो सट्टा बाजार में मनोज अग्रवाल सेवा दल पैनल के पक्ष में ज्यादा बाजार गर्म होने की जानकारी भी सामने आई। चुनाव परिणाम सोमवार को घोषित किए जाएंगे।
रविवार को डोंगरगढ़ शहर पूरे दिन पुलिस छावनी में तब्दील रहा। माँ बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के चुनाव के दौरान सर्व आदिवासी समाज ने मंदिर ट्रस्ट में 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और उग्र प्रदर्शन किया। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुबह से ही शहर की सीमा से लगे विभिन्न चौक-चौराहों पर बैरिकेट लगाकर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। इसके बावजूद हजारों की संख्या में सर्व आदिवासी समाज के सदस्य निर्धारित स्थान पर पहुँचे और रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। पुलिस प्रशासन पूरे दिन अलर्ट मोड पर रहा और आंदोलन पर कड़ी नजर रखी, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। दूसरी ओर सुबह से ही मंदिर ट्रस्ट समिति के दोनों पैनल और निर्दलीय प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने में जुटे रहे।
सीसीटीवी से रखी गई निगरानी
तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरा के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुलिस सुरक्षा बल की निगरानी में मतदान संपन्न कराया गया। एडिशनल एसपी राहुल देव शर्मा, एसडीओपी आशीष कुंजाम, तहसीलदार नीलकंठ सहित अनेक अधिकारी-कर्मचारी मौके पर उपस्थित रहे।
ट्रस्ट समिति पर गंभीर आरोप और विवाद की जड़
प्रदर्शन के दौरान सर्व आदिवासी समाज के नेताओं ने माँ बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि माँ बम्लेश्वरी आदिवासी उइके गोत्र की आराध्य देवी हैं, इसलिए इस मंदिर का प्रबंधन आदिवासी समाज द्वारा ही किया जाना चाहिए। समाज का आरोप है कि कुछ लोगों ने मंदिर पर कब्जा कर आदिवासी समाज को दरकिनार कर दिया है। यह उल्लेखनीय है कि इस मंदिर का निर्माण खैरागढ़ राज के राजा कमल नारायण सिंह ने करवाया था। जो देवी भक्त थे और कई देवी जस तथा पचरा के रचयिता भी रहे। समय के साथ, मंदिर ट्रस्ट समिति और मंदिर का पुनर्निर्माण खैरागढ़ के तत्कालीन राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह ने 1976 में करवाया और ट्रस्ट को दान देकर मंदिर का प्रबंधन सौंप दिया। तभी से यह ट्रस्ट समिति पारंपरिक रूप से मंदिर का प्रबंधन कर रही है। हालांकि, आदिवासी समाज के आंदोलन के बाद डोंगरगढ़ में अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आदिवासी समाज ने प्रशासन को अपनी माँगें पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया है और माँगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

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