0 जनपद पंचायत छुईखदान के सीईओ सौपेंगे जांच प्रतिवेदन
0 ग्राम पंचायत भुरभूसी का हुआ था भौतिक सत्यापन
गंडई पंडरिया (दावा)। नगर से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत भुरभूसी इन दिनों फर्जी बिलों के सहारे सरकारी राशि गबन करने के मामले में सुर्खियों में है। यहां पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव की मिलीभगत से लाखों रुपये का गबन करने का आरोप है। इसका खुलासा हाल ही में हुए भौतिक सत्यापन के दौरान भी हो चुका है। अब इस मामले के समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला पंचायत खैरागढ़ के सीईओ ने जनपद पंचायत छुईखदान के सीईओ को जांच कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह गौरतलब है कि त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में गांवों में विकास की गंगा बहाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है, लेकिन कुछ ग्राम पंचायतों में इस अधिकार का दुरुपयोग खुले आम किया जा रहा है और शासकीय राशि का जमकर बंदरबांट हो रहा है। ऐसा ही एक गंभीर मामला नगर से लगे ग्राम पंचायत भुरभूसी का सामने आया है। इस पंचायत में कई फर्जी बिल लगाकर पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव द्वारा लाखों रुपये गबन कर लिए गए हैं। इसका खुलासा बीते दिनों भौतिक सत्यापन के लिए आई प्रशासनिक टीम ने किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भुरभूसी में 12 जुलाई को भौतिक सत्यापन के लिए टीम पहुंची थी। इस टीम में मनीष कुमार साहू (अनुविभागीय अधिकारी, ग्रा.या. सेवा उप संभाग खैरागढ़), प्रकाशचंद्र तारम (सहायक परियोजना अधिकारी), मोहित राम ध्रुव (जिला अंकेक्षक) और जॉनसन मिंज (सहायक प्रोग्रामर) शामिल थे। जांच के दौरान पाया गया कि पूर्व सरपंच लक्ष्मी साहू पति हूलेश साहू द्वारा वित्तीय वर्ष 2020 से 2024 तक तैयार की गई रोकड़ बही में लाखों रुपये के ऐसे कई फर्जी बिल चस्पा किए गए हैं, जिनका भुगतान वेंडरों को किया ही नहीं गया है। इससे स्पष्ट है कि पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव तुका राम पटेल ने मिलीभगत कर शासन को लाखों रुपयों का चूना लगाया है। यदि पंचायती राज में ऐसे हालात रहे, तो गांव का विकास कितना होगा। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
बताया जाता है कि इन पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा ऐसे कई बिल लगाए गए हैं। जहां निर्माण कार्य हुआ ही नहीं है और इसके लिए बाकायदा मटेरियल की कई सारी बिलें लगाई गई हैं। इधर जांच में आए अधिकारियों से मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा भी गोलमोल जवाब दिया जा रहा था। जिससे ऐसा लग रहा था कि यह मामला कहीं ठंडे बस्ते में न चला जाए। हालांकि गत दिनों इस मामले में अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला पंचायत सीईओ प्रेमकुमार पटेल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल जनपद पंचायत छुईखदान के सीईओ को जांच कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है।
वेंडरों को नहीं हुआ है भुगतान
ग्राम पंचायत भुरभूसी द्वारा लगभग 50 से अधिक वेंडरों को लाखों रुपये का भुगतान किए जाने के बाकायदा बिल लगाए गए हैं, लेकिन बताया जाता है कि इन वेंडरों को वास्तव में भुगतान हुआ ही नहीं है। या फिर जिनको भुगतान हुआ भी है। वह बिल के हिसाब से नहीं किया गया है और जो बिल वाउचर दिखाए जा रहे हैं, वे पूर्णत: फर्जी हैं। यदि वेंडरों के खातों का भी स्टेटमेंट देखा जाए तो पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव की मिलीभगत उजागर हो जाएगी।
दो लाख रुपये में दो कुर्सी
बताया जाता है कि इस ग्राम पंचायत में आरसी चेमर डोंगरगढ़ को आरसीसी कुर्सी के नाम से 2 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं गांव में सिर्फ दो नग आरसीसी सीमेंट कुर्सी ही रखी गई हैं। जिसमें एक कुर्सी की कीमत 1 लाख रुपये मानी जा रही है। इस प्रकार सैकड़ों ऐसे बिल लगाए गए हैं। जिनकी सूक्ष्मता से जांच की जाए तो कई सारी सामग्रियां यहां पर मिलेंगी ही नहीं।
ग्राम पंचायत भुरभूसी के लिए रोकड़ बहीखाते का जांच के लिए आदेश जारी हुआ है की नहीं मुझे मालूम नहीं है। मैं अवकाश में हूँ।
रवि कुमार, सीईओ जनपद पंचायत छुईखदान
ग्राम पंचायत भुरभूसी मे फर्जी बिल को लेकर रोकड़बही खाते की जांच के लिए जनपद पंचायत सीईओ को 16 जुलाई को समाचार प्रकाशन के बाद आदेशित किया गया है और जांच प्रतिवेदन मंगाया गया है।
-प्रेमकुमार पटेल, सीईओ
जिला पंचायत खैरागढ़, छुईखदान, गंडई



