नेशनल हाईवे द्वारा भू अर्जित भूमि पर किसी का अधिकार नहीं साथ कोई भी उपयोग नहीं कर सकता*
राजनांदगाव: शहर में नेशनल हाइवे पर राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा राजस्व दस्तावेजो से छेड़ छाड़ व कूटरचना कर नेशनल हाइवे की भूमि को विक्रय करने एवं नगर निगम के अधिकारियो द्वारा बिना स्थल जाँच कर भवन अनुज्ञा देने का मामला प्रकाश में आया है। इस से ऐसा प्रतीत होता है नेशनल हाइवे निर्माण के समय भुअर्जन की गई भूमि व प्रकरण की गंभीरता से जाँच की गई तो छत्तीसगढ़ में हुए भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए भ्रष्टाचार जैसे मामले सामने आ सकते है।
नेशनल हाइवे की भूमि के विषय में अनेक दंडात्मक प्रावधान व कानून निर्मित है
अवैध निर्माण की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 166 और राष्ट्रीयराजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 26 के तहत कार्यवाही की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, धारा 420 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी कार्यवाही की जा सकती है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 166:
यह धारा लोक सेवक को कर्तव्य की अवज्ञा करने या गलत तरीके से कानून का उपयोग करने के लिए दंडित करती है। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर या लापरवाही से राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि पर अवैध निर्माण की अनुमति देता है, तो उस पर इस धारा के तहत कार्यवाही की जा सकती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 26:
यह धारा राजमार्ग की भूमि पर अवैध निर्माण को प्रतिबंधित करती है। यदि कोई अधिकारी इस धारा का उल्लंघन करते हुए अवैध निर्माण की अनुमति देता है, तो उस पर इस धारा के तहत कार्यवाही की जा सकती है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988:
यदि अधिकारी ने अवैध निर्माण की अनुमति देने के लिए रिश्वत ली है या किसी अन्य प्रकार का भ्रष्टाचार किया है, तो उस पर इस अधिनियम के तहत भी कार्यवाही की जा सकती है।
अन्य प्रासंगिक जानकारी:
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI):
NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। यदि किसी अधिकारी ने NHAI के नियमों का उल्लंघन किया है, तो NHAI भी उसके खिलाफ कार्यवाही कर सकता है।
राज्य सरकार:
राज्य सरकार भी राष्ट्रीय राजमार्गों के संबंध में कुछ अधिकार रखती है और वह भी अपने स्तर पर कार्यवाही कर सकती है। राजस्व विभाग के तत्कालीन आर आई राजस्व विभाग के पटवारी ने उक्त भूमि जो कि नेशनल हाईवे ने भ् अर्जित की है जिसकी राशि उक्त किसानों को दी जा चुकी थी उसके बाद उक्त भूमि के दस्तावेजों से छेड़ छाड़ कर नया दस्तावेज तैयार कर विक्रय कर मोटो रकम हड़प ली जानकारी में ज्ञात हो रहा है जांच रिपोर्ट के बाद सम्बंधित विभाग के दोषियों पर कार्यवाही होना तय है।
*सर्वजनहित समिति द्वारा जिम्मेदार अधिकारियो व कर्मचारीयों, जिन्होंने नेशनल हाईवे की संपत्ति से संबंधित राजस्व दस्तावेजों को कूट रचित कर विक्रय करवा भ्रष्टाचार किया है उनके विरुद्ध उपरोक्त धारा के अंतर्गत कार्यवाही एवं सभी दोषियों के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज़ की मांग की जाएगी।



