स्त्री रोग विषय में हासिल किए श्रेष्ठतम अंक, दादा की बहुप्रतीक्षित मेडिकल किताब के लेखन में भी दे रही हैं साथ
राजनांदगांव (दावा)। कहते हैं ‘यथा नाम तथा गुण’- यह कहावत शहर की होनहार बेटी विभूति बाफना पर बिल्कुल सटीक बैठती है। स्कूली शिक्षा के दिनों से ही अत्यंत मेधावी रहीं विभूति बाफना ने अपनी प्रतिभा के दम पर न सिर्फ पहले ही प्रयास में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय कांकेर में प्रवेश पाया, बल्कि बाद में अपग्रेड होकर उन्हें राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में दाखिला मिला। अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी की डॉक्टर के रूप में कदम रखने वाली विभूति ने हर वर्ष महाविद्यालय की प्रवीण्य (मेरिट) सूची में अपनी जगह बनाई। हाल ही में घोषित एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष के परीक्षा परिणामों में भी उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्त्री रोगविषय में श्रेष्ठतम अंक हासिल कर स्वर्ण पदक पर अपना अधिकार जमाया है।
उल्लेखनीय है कि स्वर्ण पदक विजेता विभूति बाफना देश के सुप्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. पुखराज बाफना की ज्येष्ठ पौत्री और डॉ. नवीन एवं श्रीमती दीपाली बाफना की सुपुत्री हैं। चिकित्सा क्षेत्र की इस गौरवशाली पारिवारिक विरासत को विभूति पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। वर्तमान में वे अपने दादा डॉ. पुखराज बाफना की बहुप्रतीक्षित मेडिसिन की पॉकेट किताब के संयोजन, लेखन और प्रकाशन में उनका सक्रिय रूप से साथ दे रही हैं। यह किताब मेडिकल और डेंटल छात्रों के अलावा जनरल प्रैक्टिशनर्स के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होने वाली है।
विभूति बाफना केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि शोध और रचनात्मक लेखन में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। आज से ठीक तीन वर्ष पूर्व,उनके द्वारा परजीवी विज्ञान पर लिखी गई एक विशेष वैज्ञानिक कविता को ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘द ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ पेरासिटामोलॉजी’ में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया था। जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। विभूति की इस ऐतिहासिक सफलता पर राजनांदगांव सहित पूरे प्रदेश के चिकित्सा जगत, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध जनों ने बाफना परिवार को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।



