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खैरागढ़ में रजत जयंती फूड फेस्टिवल का भव्य आयोजन, रजत महोत्सव-2025 के तहत…

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(यतेंद्र जीत सिंह “छोटू”) खैरागढ़ : रजत महोत्सव-2025 के उपलक्ष्य में राज्य शासन की मंशा अनुरूप शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय परिसर खैरागढ़ में रजत जयंती फूड फेस्टिवल का रंगारंग आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।


स्व-सहायता समूहों की शानदार प्रस्तुति
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) एवं महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ आधुनिक फास्ट फूड के आकर्षक स्टॉल लगाए।

छत्तीसगढ़ी व्यंजन पर आकर्षित रही
सुसज्जित एवं स्वच्छ वातावरण में चीला, फरा, अनरसा, ठेठरी, खुरमी, गुपचुप-चाट, दही बड़ा, मैगी-चाउमीन, पेस्ट्री, केक, नड्डा-पापड़ और मसाला बड़ी बिजौरी जैसे व्यंजनों ने खरीदारों को खूब आकर्षित किया।

ट्राइबल विभाग का विशेष स्टॉल
फूड फेस्टिवल में आदिवासी विकास (ट्राइबल) विभाग द्वारा भी आकर्षक स्टॉल लगाया गया। इसमें पारंपरिक बांस से बने उपयोगी सामान, स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित आभूषण तथा अन्य घरेलू उपयोग की पारंपरिक सामग्री प्रदर्शित की गई, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। इस स्टॉल ने आदिवासी कला एवं शिल्प की समृद्ध परंपरा को नई पहचान दिलाई।

बैगा समुदाय की सांस्कृतिक प्रस्तुति
बैगा समुदाय के हितग्राहियों ने अपने पारंपरिक गीत एवं वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में सांस्कृतिक गरिमा और लोककला की छटा बिखेरी। उनकी सहभागिता ने आयोजन को और अधिक जीवंत एवं उत्सवमय बना दिया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका खम्हन ताम्रकार, उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा चंद्राकर, जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल, अपर कलेक्टर सुरेंद्र कुमार ठाकुर सहित अनेक जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

नागरिकों की उत्साहजनक भागीदारी
फूड फेस्टिवल में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र-छात्राओं, स्व-सहायता समूह की महिलाओं तथा ग्रामीण व शहरी नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।। खरीदारों की सक्रिय उपस्थिति से आयोजन स्थल पर मेले जैसा वातावरण रहा।

सफल आयोजन
कुल 12 फूड स्टॉलों के माध्यम से लगभग ₹20,000 की बिक्री हुई। कार्यक्रम की सफलता ने न केवल स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया, बल्कि स्थानीय समुदायों और परंपराओं को भी एक साझा मंच पर गौरवपूर्ण पहचान दिलाई।

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