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टोकन के लिए आज भी भटक रहे हैं किसान…

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धान खरीदी के पूर्व का काम अब तक क्यों?, डिजिटल गिरदावली की देन है यह समस्या

डोंगरगांव (दावा)। बीते पंद्रह नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, लेकिन ज्यादातर सोसायटियों में आज भी किसान टोकन के लिए भटक रहे हैं। हालाकि हड़ताल के बाद धान खरीदी ने गति पकड़ ली है, लेकिन डिजिटल गिरदावली के चलते किसानों के रकबों में कटौती ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। हालात यह है कि सुधार संसोधन के लिए राज्य शासन ने 25 नवंबर तक का समय निर्धारित किया था, परन्तु सुधार की संसोधन की संभावना सोमवार तक नहीं हो पाई है और किसान सोसायटी से लेकर पटवारी और तहसील कार्यालय में चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि रकबे की कटौती में सुधार संसोधन कहां होगा। इसे लेकर प्रशासन की ओर से आज तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। सबसे बड़ी समस्या लघु कृषकों की है। जिनका रकबा दो एकड़ से कम है और जिन्हें एक ही टोकन जारी किया जाना है। ऐसे में सुधार संसोधन के बाद दूसरे टोकन की संभावना ही नहीं है। नतीजा यह है कि ऐसे पीडि़त किसान टोकन भी नहीं कटवा पा रहे हैं। बता दें कि दो एकड़ तक के किसानों को एक बार, दो से दस एकड़ तक के किसानों के लिए दो बार तथा दस एकड़ से अधिक के लिए तीन टोकन जारी करने का प्रावधान है।

धान खरीदी के पूर्व का काम अब तक क्यों?
इस तरह की परेशानियों को लेकर तहसील कार्यालय में पहुंंचे किसानों में हरिराम साहू ग्राम सुखरी, डालमणी पटेल बरसनटोला, खेमलाल पटेल बम्हनीभांठा सहित अन्य ने बताया कि उनका पंजीयन नहीं होने की वजह से टोकन कटने में परेशानी हो रही है। जिसके चलते धान बेचने में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। वहीं एक किसान ने बताया कर्ज लेकर फसल लगाया था और समय में धान बेचकर कर्ज जमा करने सहित घर के अन्य बड़े खर्चों को पूर्ण करना था, किन्तु सोसायटी में धान नहीं बिक पाने की स्थिति में परेशानी बढ़ेगी। शासन-प्रशासन को जो कार्य धान खरीदी के पूर्व कर लेना था। वह आज पर्यन्त तक नहीं हो पाया है और 25 नवंबर इसके लिए अंतिम दिवस दिया गया है, जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। अन्यथा अनेक छोटे किसान धान सोसायटी में बेचने से वंचित होंगे और मजूबरन उन्हें कम दर पर कोचियों और दुकानदारों को धान बेचना पड़ेगा।

डिजिटल गिरदावली की देन है यह समस्या
राज्य शासन व्दारा समर्थन मूल्य में धान खरीदी, फसल के उत्पादन तथा अतिवृष्टि अथवा सूखे की स्थिति के अनुसार प्रतिवर्ष गिरदावली का कार्य कराया जाता है। जिसमें शासन की ओर से ग्रामवार कुछ खसरों को चिन्हांकित किया जाता है। जिसमें संबंधित हल्का पटवारी के द्वारा फसल गणना एवं सत्यापन तथा उत्पादन की औसत जानकारी ग्रामवार दर्ज की जाती है, परन्तु इस वर्ष शासन के नए प्रयोग जिसमें प्रत्येक खसरे के डिजिटल सर्वे जिसमें जिओ टेगिंग कर प्रत्येक खसरे की फोटो ग्रामवार खींची गई है, लेकिन इस कार्य को हल्का पटवारी के बजाए निजी व्यक्तियों से कराया गया है। जिसके चलते फसल रकबे में गड़बड़ी की संभावना है। जबकि विशेषज्ञों की मानें तो इसे साफ्टवेयर तथा किसानों द्वारा एग्रीस्टेक के समय संधारित जानकारी भी एक कारण माना जा रहा है। बता दें कि धान खरीदी तथा भुईयां एवं एग्रीस्टेक तीनों अलग-अलग साफ्टवेयर हैं। जबकि तीनों में एक सी ही जानकारी संधारित की जा रही है। वहीं तीनों साफ्टवेयर के आपस में कम्पाईल न होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है और किसानों की यह समस्या कमोबेश पूरे तहसील एवं अनुभाग क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।

डिजिटलीकरण के कारण किसानों को धान बेचने में होने वाली समस्या को लेकर इसके पूर्व 30 अक्टूबर तक पंजीयन व सुधार कार्य के लिए समय दिया गया था। जिसे बढ़ाकर 25 नवंबर किया गया था। इसके लिए किसानों को चार माह पूर्व से ही मुनादी तथा अन्य माध्यम से जानकारी दी जा रही थी। वर्तमान में जो समस्या आ रही है। इसके लिए किसान तहसील कार्यालय में आवेदन देकर पावती जरूर ले लेंवे।
– हिरेन्द्र साहू
जिलाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा
तहसील में सुधार कार्य लगातार जारी है। सोमवार को लगभग 70 किसानों का सुधार कार्य किया गया है। एग्रीस्टेक के अंतर्गत के नवीन पंजीयन 25 नवंबर के बाद बंद हो जाएगा, लेकिन रकबा सुधार व अन्य महत्वपूर्ण सुधार के कार्य जारी रहेगा। वहीं नवीन पंजीयन में शासन से दिशा-निर्देश के अनुसार कार्य किया जाएगा।
– पीएल नाग, तहसीलदार डोंगरगांव

 

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