कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन, किसानों की समस्याओं से कराया गया अवगत
राजनांदगांव (दावा)। बारिश के पूर्व खेती -किसानी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। किसान पहले से ही खाद आदि का इंतजाम कर इस समस्या से मुक्त होना चाहते हैं। क्योंकि बारिश होते ही उन्हें सबसे पहले डीएपी खाद की की जरूरत पड़ती है। लेकिन यह खाद कई सोसायटियों में पहुंचा ही नहीं है। इससे उन्हें बाहर से महंगे दाम में निजी क्षेत्रों से खरीदना पड़ रहा है।
उपरोक्त परेशानी को देखते हुए बड़ी संख्या में किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना प्रदर्शन किए और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसान नेता सुदेश टीकम के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे बड़ी संख्या में पुरुष व महिला किसानों ने कलेक्टर के समक्ष डीएपी की किल्लत सहित यूरिया खाद व समर्थन मूल्य को लेकर अपनी बातें रखीं। किसान नेता सुदेश टीकम ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जो खाद नीति बनाई है उसमें 23 प्रतिशत यूरिया और 40 प्रतिशत डीएपी की कटौती का निर्णय लिया गया है। इतनी मात्रा में खाद खेती के लिए पर्याप्त नहीं है। फसल इससे बूरी तरह प्रभावित हो सकती है जिससे किसानों को भारी नुक्सान का सामना करना पड़ सकता है। किसान नेता टीकम ने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत जो राशि किसानों को दी जाती थी वह भी लंबित कर दिया गया है। जिसे बहाल किया जाना चाहिए।
किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे श्यामरतन, नंदूलाल लोधी ,चैतराम साहू, कृष्णा श्यामसाय सिन्हा,चंदू साहू, रमाकांत आदि किसानों ने बताया कि 3 वर्षों में अब तक धान खरीदी में वृद्धि हुई है। लेकिन आज भी धान 3300 रुपए समर्थन मूल्य में खरीदे जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि 3358 रुपए की जो बढ़ोतरी हुई है उस हिसाब से अब धान खरीदी की जानी चाहिए। किसानों ने कलेक्टर को खाद की कमी की भी समस्या बताई और कहा कि डीएपी सोसायटियों में है नहीं। यूरिया भी एक एकड़ में एक बोरी भी नहीं दिया जा रहा है।
मजबूर किसान यूरिया खाद 276 रुपए के बजाय बजार से 600 से 800 रुपए बोरी के दर पर खरीदनी पड़ रही है। इधर खेती -किसानी की लागत बढ़ती जा रही है। पिछले साल किसानों को प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया खाद दिया जा रहा था उसे घटा कर एक बोरी कर दिया गया है। एक बोरी यूरिया के स्थान पर डीएपी दिए जाने की बात कही गई है लेकिन डीएपी कही मिल नहीं रहा। बारिश सिर पर है किसान खाद के लिए मारामारा फिरने को मजबूर हैं।
खाद की कालाबाजारी बंद करो के लगे नारे
किसान नेता ने बाजार में खाद को लेकर जो कालाबाजारी की जा रही है उस ओर भी कलेक्टर का ध्यान खींचा और उस पर सरकार द्वारा लगाम लगाए जाने की बात कही। इसी तरह जैविक खाद के नाम पर रेती -मिट्टी डाल कर देने व किसानों को मूर्ख बनाने की बात कही गई। किसानों का कहना है कि इससे खेती को नुक़सान पहुचता है और फसल प्रभावित होती है। किसानों ने खाद की कालाबाजारी बंद करो के नारे भी लगाए इस दौरान व सभी बड़े-बड़े पोस्टर लिए हुए थे जिसमें खाद की कालाबाजारी बंद करो लदान बंद करो के नारे लिखे हुए थे।


