छुईखदान। नगर के मध्य स्थित पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन में स्थानांतरित होने के बाद अब यह भवन केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित रह गया है। नया अस्पताल नगर से लगभग 2 किलोमीटर दूर भाटापारा क्षेत्र में संचालित हो रहा है, जिससे नगरवासियों को इलाज के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इस कारण विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और गंभीर मरीजों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नगरवासियों का कहना है कि पहले बस स्टैंड के समीप स्थित पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी सहित स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती थीं। नगर के बीचों-बीच होने के कारण मरीज पैदल या कम समय में अस्पताल पहुंच जाते थे। लेकिन अस्पताल के नए भवन में स्थानांतरित होने के बाद लोगों को हर छोटी-बड़ी बीमारी के लिए भी 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। रात्रिकालीन समय में यह परेशानी और अधिक बढ़ जाती है। अचानक तबीयत बिगडऩे पर मरीजों और उनके परिजनों को नए अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
जिन परिवारों के पास निजी वाहन नहीं हैं, उन्हें सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई लोगों ने बताया कि आपात स्थिति में समय पर इलाज मिलना भी चुनौती बन जाता है। नगरवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम नियमित ओपीडी सेवा पुन: प्रारंभ की जाए, ताकि सामान्य मरीजों को नगर के भीतर ही प्राथमिक उपचार और डॉक्टर की सुविधा मिल सके। इससे नए अस्पताल पर भी अनावश्यक दबाव कम होगा और नगर के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। लोगों का कहना है कि पुराने भवन में पर्याप्त स्थान और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि यहां प्रतिदिन ओपीडी, दवा वितरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर दी जाएं, तो नगरवासियों को काफी सुविधा मिलेगी। अब देखना होगा कि शासन और स्वास्थ्य विभाग नगरवासियों की इस मांग पर कितना गंभीरता से विचार करता है और पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी सेवा पुन: शुरू करने के लिए क्या निर्णय लिया जाता है।



