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चार नए श्रम संहिता से बढ़ेगा कर्मचारी व मजदूरों पर शोषण : कमलजीत सिंह पिंटू…

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हित में सरकार से तत्काल वापस लेने की मांग

कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता कमलजीत सिंह पिंटू ने चार नए श्रम संहिता को कर्मचारी व मजदूरों के लिए अनुचित बताया है। इन चार श्रम संहिता के चलते बढ़ती हुई महंगाई के दौर में कर्मचारी और मजदूरों का जीवन यापन मुश्किल हो जाएगा। वहीं कंपनी मालिक, ठेकेदार और एजेंसियों की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं रहने से कर्मचारी और मजदूरों का शोषण होगा। इसलिए सरकार को तत्काल निर्णय लेते हुए इन चार नए श्रम संहिता को वापस लेना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता कमलजीत सिंह पिंटू ने बताया कि देश में 29 श्रम कानून लागू था। इन कानूनों को श्रमिकों के 1886 में अमरीका के शिकागो में बहुत बड़े संघर्ष और कई मजदूरों की शहादत के बाद लागू किया गया था। जिसे खत्म कर भारत सरकार ने चार नए श्रम संहिता को लागू करने

का निर्णय लिया है। इन नए श्रम संहिता में श्रमिक संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता 2020 शामिल है। इन चारों नए श्रम संहिता से कर्मचारी और मजदूरों का शोषण बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि नए श्रम संहिता के प्रावधान में मजदूरों को प्रतिदिन 8 के बजाय 12 घंटे काम करना पड़ेगा। अतिरिक्त काम का कोई ओवर टाइम नहीं मिलेगा। अधिकतम 40 मजदूर वाले कंपनी या ठेकेदार के लिए सरकार को किसी भी तरह की विवरणी देने की जरूरत नहीं होगी। मालिक या ठेकेदार जब चाहे तब बिना सरकार को अवगत कराए कर्मचारियों की छंटनी कर बाहर निकाल देगा। नए श्रम संहिता में यूनियन बनाने के अधिकार को खत्म कर दिए जाने से मजदूरों को अपनी बात रखनेका अवसर नहीं मिल पाएगा। अपने हक के लिए मजदूर किसी तरह की लड़ाई नहीं लड़ सकेंगे। श्री कमलजीत पिंटू ने कहा कि नए श्रम संहिता के माध्यम से सरकार ने कापोरेंट वर्ग को फायदा पहुंचाने का काम किया है। पहले तालाबंदी और कर्मचारियों की छंटनी के लिए कंपनी को सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन नए श्रम संहिता में इस नियम को शिथिल कर दिए जाने से कंपनी मालिक और ठेकेदार की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं रहेगा। आउटसोर्सिंग और ठेके में काम करने वाले मजदूरों का समूह नियमित कर्मचारियों के साथ समर्पित भाव से उत्पादन और लाभ दिलाने में योगदान देता है। इन नए श्रम संहिता से प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर दोनों के कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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