Home समाचार सीपी एंड बरार का पहला गोलीकांड की याद कर आज भी सहम...

सीपी एंड बरार का पहला गोलीकांड की याद कर आज भी सहम जाता है छुईखदान शहर…

19
0

० छुईखदान की शहादत आज भी न्याय को तरस रहा
9 जनवरी शहादत दिवस विशेष

छुईखदान (दावा)। भारत की आज़ादी के बाद शांतिपूर्ण जनआंदोलन पर सरकारी गोली चलाने का संभवत: पहला मामला 9 जनवरी 1953 को तत्कालीन सीपी एंड बरार राज्य के छुईखदान स्टेट में हुआ। उस समय छुईखदान विधानसभा मुख्यालय था और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ यथावत रखने का आश्वासन दिया गया था।

सरकार द्वारा पूर्ण तहसीलदारी एवं उपकोषालय को समाप्त कर अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्णय के विरोध में नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र की जनता ने शांतिपूर्ण आंदोलन किया। लगभग दोपहर 2.25 बजे डिप्टी कमिश्नर एम.वी. राजवाड़े एवं एसपी तनखीवाले के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया गया।

पांच की मौत, 24 स्थायी रूप से घायल
पहले हवाई फायर के बाद पुलिस ने एक साथ 19 राउंड गोलियां चलाईं। इस गोलीकांड में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 24 लोग स्थायी रूप से घायल हुए और दर्जनों को अस्थायी चोटें आईं। मृतकों में दो पुरुष एवं तीन महिलाएँ शामिल थीं।
पहले राउंड की फायरिंग में पंडित बैकुण्ठ तिवारी एवं पंडित द्वारिका प्रसाद तिवारी की मौके पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद भूलिन बाई महोबिया, कचरा बाई मुस्लिम रमसीर बाई चंद्राकर की मौत हो गई ।इसके कुछ दिनों बाद ग्राम नवागांव निवासी ठा. मनासिंह की भी इलाज के दौरान मृत्यु हुई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. पद्माकर प्रसाद त्रिपाठी भी इस गोलीकांड में घायल हुए थे।

जांच आयोग ने माना—फायरिंग अनुचित
घटना की जांच के लिए नागपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बी.के. चौधरी की अध्यक्षता में आयोग गठित किया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा ‘द फायरिंग वाज अनजस्टिफाइड’ तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष ठा. प्यारेलाल ठाकुर द्वारा मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया।

खजाना भी ले गये प्रशासन के लोग
गोलीकांड के बाद प्रशासनिक दल उपकोषालय के रिकॉर्ड, खजाना एवं फर्नीचर पड़ोस के शहर ले गये। खजाने का हिसाब-किताब आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया, जो आज भी सवालों के घेरे में है।

मरहम के नाम पर विकासखंड
घटना के बाद मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल छुईखदान पहुंचे और छुईखदान को विकास खंड मुख्यालय घोषित किया गया। इसे उस समय शहीदों के घावों पर प्रशासनिक मरहम माना गया।

इतिहास के पन्नों वर्तमान छुईखदान
छुईखदान रियासत ने भारत संघ में बिना शर्त विलय कर ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रथम विधानसभा में स्व. अमृतलाल महोबिया छुईखदान के प्रथम मनोनीत विधायक बने।

आज छुईखदान विकासखंड में तीन तहसीलें, दो नगर पंचायतें, एक जनपद पंचायत, पांच जिला पंचायत क्षेत्र, क्रमश: छुईखदान गंडई साल्हेवारा बकरकट्टा मोहगांव में पुलिस थाने एवं सी आर पी एफ इकाइयाँ हैं, इसके बावजूद क्षेत्र को पृथक विधानसभा का दर्जा नहीं मिल पाया है।

73 वर्ष बाद भी न्याय की प्रतीक्षा
गोलीकांड की 73 वीं बरसी पर क्षेत्रवासियों का कहना है कि छुईखदान ने इतिहास में भारी बलिदान दिया, लेकिन आज भी उसे उसका हक और संवैधानिक अधिकार नहीं मिला। क्षेत्र की जनता अब दलीय राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट हो रही है।

अब जिला बना, पर संतुलन नहीं
3 सितंबर 2022 को उप चुनाव में मिली विजय से खुश प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खैरागढ़-छुईखदान, गंडई को मिलाकर छत्तीसगढ़ का 31वां जिला बना दिया। लेकिन आज पर्यन्त तक इस शहर छुईखदान गंडई को कुछ नहीं मिला। अब अपनी हक की लड़ाई के लिए ये शहर सडक़ में आने को तैयार है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here