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230 करोड़ खर्च, फिर भी शहर प्यासा – अशोक फड़नवीस…

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*230 करोड़ खर्च, फिर भी शहर प्यासा – अशोक फड़नवीस

*➡️ अमृत योजना में भारी भ्रष्टाचार का आरोप, जांच से भाग रहा शासन-प्रशासन*

*➡️ विधायक डॉ. रमन सिंह की चुप्पी से शहर को हुआ नुकसान*

*राजनांदगांव ।*

शहर में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी आम जनता पानी की समस्या से जूझ रही है। अमृत योजना के तहत किए गए कार्यों पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व नगर पालिका चेयरमैन अशोक फड़नवीस ने योजना में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शासन-प्रशासन की चुप्पी को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।
श्री फड़नवीस ने अमृत योजना को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 230 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद भी शहर को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा जिससे यह साफ है कि योजना ज़मीन पर नहीं, सिर्फ कागज़ों में पूरी की गई है। श्री फड़नवीस के अनुसार अमृत योजना की पाइप लाइन निर्धारित गहराई और तय गड्ढों में नहीं बिछाई गई बावजूद इसके बिना किसी तकनीकी जांच के करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई किलोमीटर पाइप लाइन डाली ही नहीं गई, फिर भी उसका पूरा भुगतान कर दिया गया जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुरानी मुख्य पाइप लाइन से अमृत योजना की पाइप लाइन को जोड़कर दिखावटी सफाई की गई, ताकि असलियत सामने न आए। जनप्रतिनिधियों को तकनीकी अधिकारियों द्वारा गुमराह किया गया और चार इंच की पाइप से शहर की प्यास बुझाने और लंबे समय तक जलापूर्ति का संकल्प पास करा लिया गया जबकि तकनीकी रूप से यह संभव ही नहीं है। उन्होंने ने कहा कि इस योजना से शहर को कितना लाभ होगा और ठेकेदारों व अधिकारियों को कितना फायदा पहुंचेगा इसका पूरा हिसाब पहले ही तय कर लिया गया था। यह टॉप टू बॉटम मिलीभगत का मामला है जिसमें ठेकेदार, तकनीकी अधिकारी और जिम्मेदार अफसर शामिल हैं। इसी वजह से आज तक न तो जांच हो रही है और न ही कोई कार्रवाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह खेल सिर्फ राजनांदगांव तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में इसी तरह जनता के हितों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार किया गया है। हाई-प्रोफाइल क्षेत्र होने के बावजूद जहां पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष का सीधा प्रभाव है वहां भी जनता पानी की समस्या से जूझ रही है, लेकिन स्थानीय विधायक डॉ. रमन सिंह की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। चाहे वह बूढ़ा सागर का ड्रीम प्रोजेक्ट हो शहर का घटिया डामरीकरण हो या अन्य विकास कार्य सभी में भारी राशि स्वीकृत की गई लेकिन उसी अनुपात में भ्रष्टाचार की खुली छूट भी दी गई। यदि इन पैसों का सही उपयोग होता तो आज शहर की दशा और दिशा कुछ और ही होती। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक सत्ता में हों या विपक्ष में हर स्थिति में खामोशी की चादर ओढ़े हुए हैं और जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।

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