घोटिया वन क्षेत्र के तोतल भर्री में 20 से अधिक सागौन के पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी; जेसीबी और ट्रैक्टर जब्त
डोंगरगढ़ (दावा)। वनांचल ग्राम तोतल भर्री और घोटिया वन क्षेत्र में वन विभाग की नाक के नीचे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक रसूखदार किसान ने अपनी 10 एकड़ कृषि भूमि के समतलीकरण के बहाने बगल के 3 एकड़ सुरक्षित वन क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस अतिक्रमण की भेंट 20 से अधिक बेशकीमती सागौन के पेड़ और अन्य वन्य प्रजातियां चढ़ गई। मामले का खुलासा होने के बाद वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में लकड़ी और वाहन जब्त किए हैं।
सागौन की अवैध कटाई और मिलीभगत का शक
सूत्रों के अनुसार कक्ष क्रमांक 377 में पेड़ों की कटाई का यह खेल पिछले एक महीने से चल रहा था। किसान ने जेसीबी मशीन लगाकर न केवल पेड़ों को धराशायी किया। बल्कि वन भूमि को अपनी जमीन में मिलाकर मेढ़ भी बना दी। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान बीट गार्ड और चौकीदार को इसकी भनक तक नहीं लगी। चर्चा है कि बीट गार्ड देवकट्टा जलाशय के पास कूप कटाई में व्यस्त होने का बहाना बना रहे हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुई कटाई बिना किसी भीतरी मिलीभगत के संभव नहीं दिखती।
भारी मात्रा में जप्त लकड़ी
उप वनमंडल अधिकारी के मार्गदर्शन और वन परिक्षेत्र अधिकारी भूपेंद्र उईके के नेतृत्व में हुई छापेमारी में विभाग को बड़ी सफलता मिली है। जिमसें अब तक दो ट्रैक्टर लकड़ी अछोली काष्ठगार लाई गई है, जिसमें 55 नग गोलों में से 44 नग शुद्ध सागौन हैं। लगभग 10 घन मीटर लकड़ी जब्त होने की संभावना है। वर्तमान में 3.415 घन मीटर लकड़ी दर्ज की जा चुकी है। कटाई और समतलीकरण में प्रयुक्त जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर को भी जब्त कर लिया गया है। अतिक्रमण वाली जगह से लगे अन्य कक्षों के बीट गार्डों और चौकीदारों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि सप्ताह में एक बार भी क्षेत्र का दौरा किया जाता, तो इतने बड़े पैमाने पर हरे-भरे वृक्षों को कटने से बचाया जा सकता था। आरोप है कि बीट गार्डों की लापरवाही के कारण ही आज जंगल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
अधिकारी का कथन
वन क्षेत्र में अवैध कटाई करने वाले किसान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। मौके से जेसीबी, ट्रैक्टर और कटी हुई लकडिय़ों को जब्त कर लिया गया है। काटे गए पेड़ों की सटीक गणना की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
– भूपेंद्र उईके, वन परिक्षेत्र अधिकारी



