उग्र आंदोलन की चेतावनी
राजनांदगांव। कांग्रेस पार्टी की पूर्व विधायक छन्नी साहू ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार देता है और यह अधिकार किसी सरकार, अधिकारी या राजनीतिक दल की कृपा नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का मूल और अटूट लोकतांत्रिक अधिकार है। इस अधिकार पर किसी भी प्रकार का प्रहार लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छन्नी साहू ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के माध्यम से वैध मतदाताओं के नाम सुनियोजित तरीके से विलोपित करने के प्रयास लगातार सामने आ रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से कांग्रेस समर्थित मतदाताओं को निशाना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से नाम कटवाने का प्रयास किया जा रहा है। जैसे-जैसे प्रकरण सामने आ रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होने लगा है मानो फॉर्म-7 निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वैधानिक दस्तावेज न होकर किसी पार्टी विशेष का औजार बन गया हो।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी गंभीर संदेह को जन्म देती है। ऐसे संवेदनशील विषय पर प्रशासन को मौन रहने के बजाय मुखर होकर निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। फॉर्म-7 के प्रारूप में गलत जानकारी देने पर दंड का स्पष्ट प्रावधान है, इसके बावजूद दोषियों पर कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि या तो प्रशासन दबाव में है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
छन्नी साहू ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिले में ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन प्रस्तुत किए गए प्रत्येक फॉर्म-7 की गंभीरता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सूक्ष्म जांच सुनिश्चित की जाए तथा बिना ठोस सत्यापन के किसी भी वैध मतदाता का नाम विलोपित न किया जाए। साथ ही, जिन व्यक्तियों द्वारा जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देकर फॉर्म-7 प्रस्तुत किए गए हैं, उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं ताकि क्षेत्र की जनता के सामने उनका वास्तविक चेहरा उजागर हो सके और भविष्य में इस प्रकार की कृत्यों पर प्रभावी रोक लग सके।
उन्होंने दो टूक कहा कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के उपरांत यदि एक भी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया तो एक-एक गांव से उग्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा। जिला निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया जाएगा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाएगा। उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सम्पूर्ण जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं प्रशासन की होगी। यदि लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो प्रशासन को जनता की अदालत में जवाब देना ही पड़ेगा।



