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गोंडवानाकालीन विरासत ‘गंगासागर तालाब’ का होगा कायाकल्प, नगर पालिका ने शुरू किया जीर्णोद्धार…

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बालोद(दावा)। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित गंगासागर तालाब शहर की प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के रूप में जाना जाता है। वर्षों पुराना यह तालाब न केवल जलस्रोत है, बल्कि इसे शहर की जीवन रेखा भी माना जाता है। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2000 से 2004 के बीच इसका व्यापक कायाकल्प कर इसे छत्तीसगढ़ के मॉडल तालाब के रूप में विकसित किया गया था, जिससे इसकी सुंदरता और उपयोगिता दोनों में वृद्धि हुई। समय के साथ तालाब के संरक्षण और रखरखाव की आवश्यकता को महसूस करते हुए अब नगर पालिका प्रशासन द्वारा पुन: इसका जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ किया गया है।

इस कार्य के अंतर्गत तालाब की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई सेफ्टी वॉल का निर्माण किया जा रहा है। वहीं जल की स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। नगर पालिका का उद्देश्य इस ऐतिहासिक तालाब को पहले से अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और आकर्षक बनाना है, ताकि आने वाली पीढिय़ां भी इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को समझ सकें।

गंगासागर तालाब स्थानीय नागरिकों की आस्था, पर्यटन और पर्यावरण संतुलन का केंद्र है। यहां वर्षभर लोग पूजा-अर्चना, भ्रमण और सामाजिक गतिविधियों के लिए पहुंचते हैं। नगर पालिका की इस पहल से न केवल तालाब की सुंदरता में वृद्धि होगी। बल्कि शहर के पर्यावरण और जल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि तालाब के जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होने के बाद गंगासागर तालाब पुन: अपनी ऐतिहासिक गरिमा और प्राकृतिक सुंदरता के साथ क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण बनेगा तथा शहर की पहचान को और सशक्त, बालोद नगर पालिका उपाध्यक्ष कमलेश सोनी जी ने कहा कि गोंडवाना कालीन ऐतिहासिक धरोहर गंगासागर तालाब आस्था, इतिहास और सुंदरता का अद्भुत संगम है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित गंगासागर तालाब एक ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का प्राचीन स्थल है, जो गोंडवाना काल की गौरवशाली धरोहर के रूप में आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है। यह तालाब वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र रहा है, जहां स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। बालोद नगर पालिका के वार्ड 18 के पार्षद गिरजेस गुप्ता ने बताया कि इतिहासकारों और स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार गंगासागर तालाब का निर्माण गोंडवाना शासनकाल में जल संरक्षण और जनजीवन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कराया गया था। उस समय यह तालाब न केवल जलस्रोत के रूप में उपयोगी था, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक आयोजनों का भी प्रमुख केंद्र माना जाता था। आज भी यह स्थल उस ऐतिहासिक विरासत को जीवंत रूप में संजोए हुए है। धार्मिक दृष्टि से गंगासागर तालाब अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, वहीं विशेष पर्वों और त्योहारों के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग स्नान और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। छठ पूजा, मकर संक्रांति, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर तालाब परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अनूठा वातावरण देखने को मिलता है। तालाब के चारों ओर फैली प्राकृतिक हरियाली और शांत वातावरण इसे एक आकर्षक और मनोहारी स्थल बनाते हैं। यह स्थान न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी है। सुबह-शाम लोग यहां भ्रमण और पूजा के लिए पहुंचते हैं, जिससे यह स्थल जनजीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि, गंगासागर तालाब की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को देखते हुए इसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और समुचित विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। यदि इस प्राचीन धरोहर का व्यवस्थित विकास किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन के नक्शे पर भी एक प्रमुख स्थान बना सकता है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हो सकते हैं। इतिहास, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण गंगासागर तालाब बालोद जिले की अमूल्य धरोहर है। यह केवल एक तालाब नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है, जिसे सुरक्षित और संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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