Home छत्तीसगढ़ बजट पेश हुआ पर सदस्यों ने रोकी मंजूरी…

बजट पेश हुआ पर सदस्यों ने रोकी मंजूरी…

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खैरागढ़ (दावा)। जनपद पंचायत छुईखदान के वित्तीय वर्ष 2025-26 के कथित ‘फर्जी और बोगस बजट’ को लेकर उठे विवाद में अब प्रशासनिक जांच पूरी हो गई है। जिला पंचायत स्तर से गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें बिना अनुमोदन बजट भेजे जाने की पुष्टि तो हुई है, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से फर्जी या मनगढ़ंत साबित नहीं माना गया। जांच रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण को नियमों के विपरीत प्रक्रियात्मक त्रुटि बताया गया है।

बजट भेजा गया पर अनुमोदन नहीं मिला
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 और 2025-26 दोनों वित्तीय वर्षों के बजट अनुमान सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा में प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन सदस्यों द्वारा अनुमोदन नहीं दिया गया। इसके बावजूद जनपद पंचायत के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से बजट उच्च कार्यालय (उपसंचालक पंचायत) को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया। उपसंचालक कार्यालय ने बजट को वापस करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि इसे विधिवत अनुमोदित कर प्रस्ताव क्रमांक और बैठक की तारीख सहित पुन: भेजा जाए। यानी उच्च स्तर पर भी बिना अनुमोदन बजट स्वीकार नहीं किया गया।

समितियों ने काल्पनिक आंकड़ों
का आरोप लगाकर किया इंकार
जांच में सामने आया कि 14 नवंबर 2025 की सामान्य प्रशासन समिति बैठक में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बजट पर चर्चा हुई। समिति ने आरोप लगाया कि, 2024-25 का व्यय बिना अनुमोदन के किया गया और 2025-26 के बजट में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा काल्पनिक आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इसी आधार पर बजट को मंजूरी देने से इंकार कर दिया गया और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजने का निर्णय लिया गया।

जनवरी 2026 की बैठक में भी बजट को मंजूरी नहीं मिली और पहले पुराने बजट को विधिवत पारित करने के बाद ही आगे की कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया।
कानून क्या कहता है
रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 73 और जनपद पंचायत (बजट अनुमान) नियम, 1997 का हवाला देते हुए कहा गया, कि हर पंचायत को अगले वर्ष का बजट निर्धारित प्रक्रिया से तैयार करना अनिवार्य है। सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा द्वारा अनुमोदन आवश्यक है। 30 जनवरी तक बजट पारित कर 10 फरवरी तक उच्च अधिकारी को भेजना चाहिए। बिना अनुमोदन बजट भेजना नियमों के विपरीत माना गया।

प्रक्रियात्मक त्रुटि पर अनियमित व्यय संभव
जांच समिति ने माना कि, बिना अनुमोदन बजट भेजना और खर्च करना अनियमित है पर इसे आपराधिक फर्जीवाड़ा घोषित नहीं किया गया। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि, पिछले वर्षों के खर्च को नियमित करने के लिए कार्योपश्चात अनुमोदन लिया जा सकता है, बशर्ते पूरा लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

दोष किसका, स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट में तत्कालीन अधिकारियों को जिम्मेदार बताया गया है, लेकिन उनका पक्ष दर्ज नहीं हो सका क्योंकि उनका तबादला हो चुका था या वे जांच के समय उपलब्ध नहीं थे। इससे जवाबदेही का प्रश्न अभी भी खुला हुआ है।

शिकायतकर्ता के आरोप और विवाद जारी
शिकायतकर्ता सभापति सुधीर गोलछा ने जांच रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया कि, यह वास्तविक शिकायत से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘फर्जी और भ्रामक’ रिपोर्ट है, जिसमें मुख्य मुद्दे, बिना अनुमोदन बजट भेजना और उस पर हुए खर्च—को गौण बनाकर अनावश्यक व भटकाने वाले तथ्यों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच दल ने न तो शिकायतकर्ता का पक्ष ठीक से लिया और न ही वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच की, जिससे साफ प्रतीत होता है कि, पूरी कार्रवाई दोषियों को बचाने के लिए की गई है। गोलछा ने आरोप लगाया कि, जांच दल धनबल और प्रभाव के आगे झुक गया तथा निष्पक्ष जांच के बजाय ‘कागजी औपचारिकता’ निभाई गई। उनके अनुसार यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से सच्चाई दबाने का प्रयास है, इसलिए वे इस रिपोर्ट को न्यायालय में चुनौती देंगे ताकि जनधन के संभावित दुरुपयोग और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका उजागर हो सके। रिपोर्ट जिला पंचायत को सौंप दी गई है और अंतिम निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया जाना है। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यदि पंचायत अपने कर्तव्य का पालन नहीं करती, तो जिलाधीश को हस्तक्षेप कर कार्य पूरा कराने का अधिकार है।

आदेश मिलते ही निष्पक्ष जांच की,
रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी
जांच अधिकारी एवं जिला पंचायत की लेखाधिकारी कल्पना हेड़ाऊ ने बताया कि, उन्हें प्राप्त आदेश के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की गई। संबंधित दस्तावेजों, बैठक रजिस्टर और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जांच प्रतिवेदन तैयार कर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा उपसंचालक (पंचायत) को भेज दिया गया है।
जांच अधिकारी कल्पना हेड़ाउ

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