(राजेश मेश्राम)
जोंधरा (दावा)। शासन-प्रशासन भले ही सुशासन के दावे करे, लेकिन जमीनी स्तर पर राजस्व विभाग के छोटे कर्मचारी आम जनता को किस कदर परेशान कर रहे हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम कोटरा सरार में देखने को मिला है। यहां एक किसान पिछले पांच महीनों से अपने जमीन के पर्चे (ऋण पुस्तिका) के लिए पटवारी के चक्कर काट रहा है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम निवासी विनोद गायकवाड़ ने अपनी जमीन (खसरा नं. 48713, रकबा 0.202 हेक्टेयर) का फावती (नामांतरण) उठाने के लिए अक्टूबर 2025 में हल्का नंबर 36 की पटवारी राधिका चंद्रवंशी को आवेदन दिया था। उस समय पटवारी ने एक सप्ताह के भीतर काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज फरवरी 2026 बीतने को है और पीडि़त किसान के हाथ अब भी खाली हैं। पटवारी की इस लेटलतीफी का खामियाजा किसान को भारी आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ा है। विनोद गायकवाड़ ने बताया कि पर्चा नहीं बनने के कारण वह इस वर्ष अपना धान नहीं बेच पाया। पटवारी लगातार यह दिलासा देती रही कि नया पर्चा बनने के बाद वह अपने नाम से धान बेच सकेगा, लेकिन सीजन निकल गया और काम नहीं हुआ।
तहसीलदार की लंबी छुट्टी का बहाना
हैरानी की बात यह है कि जब भी पीड़ित किसान ने पटवारी से संपर्क किया, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि तहसीलदार छुट्टी पर हैं। सवाल यह उठता है कि क्या कोई जिम्मेदार अधिकारी लगातार पांच महीनों तक छुट्टी पर रह सकता है? यदि अधिकारी छुट्टी पर है, तो शासन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? क्या पटवारी द्वारा केवल काम टालने के लिए झूठा बहाना बनाया जा रहा है? अपनी फरियाद लेकर दर-दर भटक रहे विनोद गायकवाड़ ने अब समाचार पत्रों के माध्यम से राजनांदगांव जिलाधीश (कलेक्टर) का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल नवीन पर्चा उपलब्ध कराया जाए ताकि वे आगामी कृषि कार्यों को सुचारू रूप से कर सकें।


