तरुण नाथ योगी
बालोद (दावा)। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों एवं नदी किनारों पर बिना लाइसेंस संचालित लाल ईंट भ_ों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है, और आश्चर्यजनक रूप से प्रशासन मौन साधे बैठा है। नियमों को दरकिनार कर चल रहे इन अवैध भ_ों से न केवल शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण, वन संपदा और किसानों की उपजाऊ भूमि पर सीधा आघात हो रहा है।
बिना अनुमति, बेखौफ संचालन
सूत्रों के अनुसार कई भ_ा संचालक बिना वैध लाइसेंस, बिना राजस्व अनुमति और बिना छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल की स्वीकृति के ईंट निर्माण कर रहे हैं। नियमों के तहत किसी भी ईंट भ_े के संचालन के लिए राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं आवश्यकतानुसार खनिज (माइनिंग) विभाग से अनुमति अनिवार्य है। इसके बावजूद कई स्थानों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर या बिना किसी अनुमति के भ_े धधक रहे हैं।
जहरीला धुआँ, बीमार हो रहे ग्रामीण
इन भ_ों से निकलने वाला घना काला धुआँ आसपास के गांवों में फैल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, दमा और अन्य श्वास संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं। बिना मानक चिमनी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के संचालित ये भ_े वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि ऐसे अनियंत्रित भ_े स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को बिगाड़ते हैं और दीर्घकालीन स्वास्थ्य संकट को जन्म देते हैं।
किसानों की जमीन बन रही बंजर
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि उपजाऊ कृषि भूमि की ऊपरी मिट्टी (टॉप सॉइल) को खोदकर ईंट निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि बिना अनुमति खेतों की मिट्टी निकाली जा रही है, जिससे भूमि की उर्वरता घट रही है और भविष्य में खेत बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है। खनन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह अवैध मिट्टी उत्खनन पर तत्काल रोक लगाए, परंतु विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
वन संपदा पर हमला-फॉरेस्ट विभाग क्यों मौन?
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कई भ_ों में ईंधन के रूप में अवैध रूप से काटे गए वृक्षों का उपयोग किया जा रहा है। आम, इमली, बबूल जैसे उपयोगी वृक्षों को काटकर भ_ों में झोंका जा रहा है। यदि यह सत्य है तो यह सीधा-सीधा वन अधिनियम का उल्लंघन है। प्रश्न उठता है कि संबंधित वन परिक्षेत्र के अधिकारी, डिप्टी रेंजर और वन रक्षक आखिर निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे? क्या अवैध कटाई और परिवहन पर उनकी नजर नहीं पड़ रही या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? यदि वन विभाग और माइनिंग विभाग सख्त कार्रवाई करें तो न केवल राजस्व की हानि रोकी जा सकती है, बल्कि सैकड़ों पेड़ों और पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों को कई बार सूचना दी गई, परंतु कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। यदि अवैध भ_ों की जांच निष्पक्ष रूप से हो, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। यह मामला केवल अवैध व्यवसाय का नहीं, बल्कि पर्यावरणीय अपराध, राजस्व हानि और ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
तत्काल मांग
जिले के सभी ईंट भ_ों की संयुक्त टीम द्वारा जांच की जाए। बिना लाइसेंस संचालित भ_ों को तत्काल सील किया जाए। अवैध मिट्टी उत्खनन और वृक्ष कटाई पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो। प्रदूषण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि प्रशासन अब भी मौन रहा, तो यह मौन आने वाली पीढय़िों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ अन्याय सिद्ध होगा। बालोद की जनता अब जवाब चाहती है आखिर अवैध भ_ों पर कार्रवाई कब होगी?


