सुबह 9:7 बजे से शुरू होगा सूतक काल,
शाम 7:30 बजे शुद्धिकरण के बाद होंगे दर्शन, पुरोहित संघ ने जारी की गाइडलाइन
राजनांदगांव (दावा)। अखिल भारतीय पुजारी पुरोहित संघ द्वारा आगामी खण्डग्रास चंद्रग्रहण के मद्देनजर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकुमार निर्वाणी एवं कार्यालय प्रमुख वैभव निर्वाणी ने बताया कि 3 मार्च को लगने वाले खण्डग्रास चंद्रग्रहण के कारण जिले सहित देश के प्रमुख मंदिरों के पट बंद रहेंगे। ग्रहण का सूतक काल सुबह से ही प्रभावी हो जाएगा। जिस दौरान पूजा-पाठ व शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। पुरोहित संघ के अनुसार, चंद्रग्रहण में 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रभावी होता है। सूतक काल प्रारंभ 3 मार्च सुबह 9:7 बजे से, चंद्रग्रहण स्पर्श : शाम 6:7 बजे, चंद्रग्रहण मोक्ष शाम 6:47 बजे, पट खुलने का समय : शाम 7:30 बजे (शुद्धिकरण के पश्चात) तक रहेगा।
सूतक काल में क्या करें, क्या न करें?
संघ ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। भोजन व सुरक्षा : चावल, दाल एवं सूखी खाद्य सामग्रियों में तुलसी पत्ता या कुश डालकर रखें। मान्यता है कि इससे ग्रहण का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। मंत्र जाप : सूतक काल के दौरान गुरु मंत्रों का जाप करना श्रेयस्कर माना गया है। सक्षम लोगों को सूतक से मोक्ष तक भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए, हालांकि यह नियम बुजुर्गों और बच्चों पर कड़ाई से लागू नहीं होता। प्रेस विज्ञप्ति में त्योहारों की तिथियों को भी स्पष्ट किया गया है। 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ हो चुका है। आगामी 27 फरवरी को आमलक्की (रंगभरी) एकादशी मनाई जाएगी। इसके पश्चात 2 मार्च को होलिका दहन होगा और 4 मार्च (बुधवार) को प्रतिपदा तिथि पर हर्षोल्लास के साथ बसंतोत्सव (होली) मनाया जाएगा। संघ के प्रमुख पदाधिकारियों—अभिषेक चौबे, आकाश शर्मा, शिवेन्द्र वैष्णव, और तारक निर्मोही सहित दर्जनों पुरोहितों ने समस्त पुजारी वर्ग से 3 मार्च को ग्रहण काल के दौरान मंदिरों के पट बंद रखने और नियमों का पालन करने का आह्वान किया है।



