तीन माह की जगह मिला सिर्फ दो माह का वेतन, सेवानिवृत्त कर्मचारी भी आखिरी छह माह की पगार को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर
राजनांदगाँव। होली जैसे रंगों और खुशियों के पर्व के बीच नगर निगम के सफाई कर्मियों के घरों में इस बार मायूसी का साया छाया हुआ है। महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। त्यौहार के समय जहां हर घर में खुशियां होनी चाहिए वहीं सफाई कर्मियों के परिवारों में चिंता और असंतोष का माहौल है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा तीन माह के बकाया वेतन में से केवल दो माह का ही भुगतान किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि शासन स्तर पर किसी भी त्यौहार में वेतन नहीं रोकने की बात कही जाती है।लेकिन स्थानीय स्तर पर इस निर्देश का पालन नहीं हो रहा है। सफाई कर्मियों का आरोप है कि होली जैसे बड़े पर्व में भी पूरा भुगतान न किया जाना उनके साथ अन्याय है। वेतन के अभाव में घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अपने आखिरी छह माह के वेतन के लिए आयुक्त और महापौर कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें राहत मिलनी चाहिए लेकिन भुगतान न मिलने से वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। राज्य सफाई आंदोलन की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती बबिता कुलदीप जो स्वयं वार्ड क्रमांक 26 गोल बाजार गुडाखू लाइन जयस्तंभ चौक क्षेत्र में सफाई कार्य करती हैं ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी पूरी ईमानदारी और लगन के साथ शहर की स्वच्छता बनाए रखने में जुटे हैं, लेकिन उनके परिश्रम का सम्मान नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने शासन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी त्यौहार में कर्मचारियों का वेतन नहीं रोका जाना चाहिए।फिर भी नगर निगम द्वारा तीन माह के भुगतान में सिर्फ दो माह का वेतन दिया जाना पूरी तरह अनुचित है। नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। सफाई कर्मियों का कहना है कि यदि समय पर वेतन नहीं मिला तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। त्यौहार के समय कर्मचारियों की उपेक्षा से प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर हो रही है। सफाई कर्मियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बकाया वेतन का जल्द से जल्द पूरा भुगतान किया जाए ताकि वे भी अपने परिवार के साथ होली का पर्व सम्मान और खुशी के साथ मना सकें। रंगों के इस त्यौहार में जहां पूरा शहर खुशियां मनाने की तैयारी में है वहीं शहर को स्वच्छ रखने वाले कर्मियों की जिंदगी में आर्थिक तंगी का रंग चढ़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कब तक संज्ञान लेता है।



