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छुईखदान जनपद में वेतन विवाद ने पकड़ा तूल, प्रभारी सीईओ पर मनमानी के आरोप; जांच की मांग से गरमाई सियासत..

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खैरागढ़। छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान जनपद पंचायत में प्रशासनिक खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन रोके जाने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। जनपद पंचायत छुईखदान के सभापति सुधीर गोलछा द्वारा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखे गए विस्तृत पत्र ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। पत्र में प्रभारी सीईओ श्रीमती केश्वरी देवांगन पर अधिकारों के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र क्रमांक 22/सभापति/जप छुई/2026, दिनांक 19 मार्च 2026 में सभापति ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि प्रभारी सीईओ के रूप में कार्यरत अधिकारी द्वारा लगातार ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जो न केवल प्रशासनिक दृष्टि से आपत्तिजनक हैं, बल्कि वैधानिक रूप से भी संदिग्ध हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन को बिना सक्षम स्वीकृति और बिना किसी स्पष्ट कारण के रोका जा रहा है, जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
नियमों को दरकिनार कर लिया जा रहा फैसला
सभापति ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों की अनदेखी का प्रतीक है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकारी को इस प्रकार कर्मचारियों का वेतन रोकने का एकतरफा अधिकार प्राप्त नहीं है। यदि ऐसा किया गया है, तो यह न केवल सेवा शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि वित्तीय अनुशासन को भी चुनौती देता है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस तरह के मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। ऐसे में बिना दस्तावेजी आधार के वेतन रोका जाना गंभीर अनियमितता माना जा सकता है।
कर्मचारियों में नाराजगी, व्यवस्था पर असर-इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अधिक असर ग्राम पंचायत सचिवों पर पड़ रहा है। वेतन रुकने के कारण कई सचिव आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि समय पर वेतन नहीं मिलने से घर का बजट बिगड़ गया है, बच्चों की फीस जमा करने में कठिनाई हो रही है और दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है। वहीं, इसका असर पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्यों पर भी दिखने लगा है। कई योजनाएं धीमी पड़ गई हैं, जबकि कुछ कार्यों में देरी की स्थिति बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका सीधा असर जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है।
यह केवल वेतन का नहीं, सिस्टम का सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल वेतन रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और अधिकारों के संतुलन का भी मुद्दा है। यदि किसी अधिकारी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिए जाते हैं, तो यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
जांच के लिए उठे कई सवाल-सभापति द्वारा भेजे गए पत्र में इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कई अहम सवाल उठाए गए हैं- प्रभारी सीईओ बनने के बाद अब तक कितने ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोका गया?
0 किन-किन सचिवों का वेतन प्रभावित हुआ और कितने समय से भुगतान लंबित है?
0 वेतन रोकने के पीछे क्या कारण अभिलेखों में दर्ज हैं?
0 क्या प्रभारी सीईओ को इस प्रकार का निर्णय लेने का वैधानिक अधिकार है?
0 यदि अधिकार नहीं है, तो क्या यह वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग का मामला बनता है?
0 क्या यह कृत्य सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है?
कार्रवाई की मांग तेज
सभापति ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को सीमित या निलंबित करने पर भी विचार किया जाए, ताकि किसी प्रकार का प्रभाव या हस्तक्षेप जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसमें निलंबन, पद से हटाना या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं।
प्रशासन की साख दांव पर
यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। यदि इस प्रकार की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे आम जनता का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो सकता है। फिलहाल पूरे जिले में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पंचायत प्रतिनिधि, कर्मचारी और आम नागरिक सभी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई ही यह तय करेगी कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

‘नियमों को ताक पर रखकर जनपद पंचायत छुईखदान में तृतीय श्रेणी कर्मचारी प्रभारी सीईओ द्वारा मनमानीपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। उच्च कार्यालय के अधिकारी भी दबाव में नजर आते हैं।’
– सुधीर गोलछा, सभापति जनपद पंचायत छुईखदान….

‘शिकायत प्राप्त हुई है, 4-5 बिंदु में प्रभारी सीईओ से जवाब मांगा गया है, संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने पर कार्यवाही की जाएगी। नियमों के पालन करने निर्देशित किया गया है।’
– प्रेम कुमार पटेल सीईओ, जिला पंचायत, खैरागढ़

 

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