चार साल बाद भी अधूरे पड़े हैं दो अहम अंडर ब्रिज, रेलवे प्रशासन की लेटलतीफी से पटरी पार के 50 हजार रहवासी त्रस्त
राजनांदगांव (दावा)। राजनांदगांव रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक और भव्य स्वरूप तो दिया जा रहा है, लेकिन शहरवासियों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले दो प्रमुख अंडर ब्रिज (गौरी नगर और स्टेशन पारा) पिछले चार वर्षों से अधूरे पड़े हैं। एक ओर जहां चौथी रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। वहीं अंडर ब्रिज निर्माण की मंथर गति ने पटरी पार रहने वाले हजारों नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
ओवरब्रिज पर दुर्घटनाओं का बना रहता है साया
शहर के चिखली, गौरी नगर और स्टेशन पारा इलाके के लगभग 50 हजार से अधिक रहवासी प्रतिदिन इस समस्या से जूझ रहे हैं। खैरागढ़ रोड स्थित ओवरब्रिज के अत्यधिक चढ़ावदार होने के कारण अक्सर वहां भारी वाहन फंस जाते हैं या खराब हो जाते हैं, जिससे घंटों लंबा जाम लगा रहता है। इस ढलान और चढ़ाव पर पूर्व में कई घातक दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। बावजूद इसके, रेलवे प्रशासन इन अंडर ब्रिजों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
70 से 90 प्रतिशत काम पूरा, फिर भी अटका है मामला
जानकारी के अनुसार स्टेशन पारा अंडर ब्रिज का काम लगभग 70 प्रतिशत और गौरी नगर अंडर ब्रिज का काम करीब 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। मुख्य समस्या बॉक्स पुशिंग और सिग्नल केबल शिफ्टिंग की है। रेलवे मंडल से बॉक्स पुशिंग के लिए जरूरी ब्लॉक (अनुमति) नहीं मिलने के कारण अंतिम चरण का काम अटका हुआ है। इसके चलते स्कूली छात्र, मरीज और कामकाजी लोग स्टेशन पारा रेलवे फाटक पर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
16 करोड़ की परियोजना और चौथी लाइन का विस्तार
रेलवे मंत्रालय राजनांदगांव स्टेशन को एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस कर रहा है। नागपुर-राजनांदगांव सेक्शन में चौथी रेल लाइन बिछाने का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही शहर की ओर प्लेटफॉर्म नंबर-1 का विस्तार दिखेगा, लेकिन स्थानीय यातायात सुविधाओं (अंडर ब्रिज) की अनदेखी ने विकास के इन दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।



