7 वार्ड में टैक्स दोगुना, ‘जनता
बनाम सिस्टम’ की जंग तेज
कैट ने कहा हर जगह एक समान हो टैक्स
राजनांदगांव(दावा)। नगर निगम द्वारा संपत्ति कर में की गई भारी बढ़ोतरी अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह ‘जनता बनाम सिस्टम’ की सीधी लड़ाई बनती जा रही है। 7 वार्डों में टैक्स दोगुना और करीब एक दर्जन वार्डों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के फैसले ने आम लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।
जब फैसले थोपे जाएं, तो विरोध जन्म लेता है
नगर निगम इसे आर्थिक मजबूती का कदम बता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह फैसला सीधे जनता की जेब पर भारी पड़ रहा है। बिना पर्याप्त जनसंवाद और पारदर्शिता के लागू इस बढ़ोतरी ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सिस्टम जनता की सुन भी रहा है- आंकड़ों में बढ़ोतरी, जमीन पर परेशानी, 7 वार्डों में 100 प्रतिशत (दोगुना) टैक्स, लगभग 12 वार्डों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि, कई क्षेत्रों में 15 प्रतिशत से 37 प्रतिशत तक बढ़ोतरी, ये आंकड़े सिर्फ प्रतिशत नहीं, बल्कि हर घर के बजट पर सीधा असर हैं। आवासीय से लेकर व्यावसायिक संपत्तियों तक, हर वर्ग इस फैसले की मार झेल रहा है। छोटे व्यापारी और मध्यमवर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिनके लिए यह बढ़ोतरी ‘अतिरिक्त बोझ’ बनकर सामने आई है।
विपक्ष खामोश, कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े जनहित के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस, अब तक कोई प्रभावी विरोध दर्ज नहीं करा पाई है। प्रदेश, जिला और नगर—तीनों स्तरों पर कांग्रेस की चुप्पी ने राजनीतिक चर्चाओं को और गर्म कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि जब जनता सिस्टम से लड़ रही है, तब विपक्ष आखिर किस भूमिका में है? लोग पूछ रहे हैं कि जब शहर की मूलभूत सुविधाएं—सडक़, पानी, सफाई—जैसी की तैसी हैं, तो फिर टैक्स में इतनी भारी बढ़ोतरी किस आधार पर
कैट व्यापारी संगठन बोला हर
वार्ड का टैक्स एक समान हो
संपत्ति कर वृद्धि के खिलाफ अब व्यापारी वर्ग भी खुलकर सामने आने लगा है। कैट के शरद अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि, शासन के नियमों के अनुसार सभी क्षेत्रों में एक समान संपत्ति कर वृद्धि होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कारधानी में हमेशा से व्यापारियों और आम जनता को राहत देने की परंपरा रही है, लेकिन वर्तमान निर्णय इस परंपरा के विपरीत है।
कैट के प्रदेश संरक्षक अनिल बरडिया, जिला अध्यक्ष राजू डागा सहित संजय तेजवानी, भावेश अग्रवाल, संजय लड्ढा, अमित खंडेलवाल, अशोक पांडे एवं लक्ष्मण लोहिया ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए एकरूपता लागू करने की बात कही।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वार्ड क्रमांक 36 में संपत्ति कर पहले 23 था, जिसे बढ़ाकर 65 कर दिया गया है—यानी लगभग तीन गुना वृद्धि। इसी तरह अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दरें लागू की गई हैं, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
अब आर-पार की स्थिति
शहर का माहौल संकेत दे रहा है कि अगर इस फैसले पर जल्द पुनर्विचार नहीं हुआ, तो विरोध और तेज हो सकता है। अब यह मुद्दा सिर्फ कर वृद्धि का नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ जनता के विश्वास का बन गया है। लोकतंत्र में सिस्टम जनता के लिए होता है, न कि जनता सिस्टम के लिए। जब फैसले जनता की सहमति के बिना थोपे जाते हैं, तो असंतोष संघर्ष में बदल जाता है।



