विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पशु चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में राजनांदगाव के जिला पशु चिकित्सालय पदस्थ के वेटनरी सर्जन डॉ. तरूण रामटेके को कृषि एवं पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम के कर-कमलों द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रामविचार नेताम जी, मंत्री, छ ग शासन, कृषि, पशुधन विकास विभाग, बृजमोहन अग्रवाल पूर्व मंत्री एवं सांसद रायपुर लोकसभा क्षेत्र, नीलकंठ टेकाम जी विधायक केशकाल (Rtd IAS,) कमल वर्मा छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक साथ ही पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के पूर्व प्रांताध्यक्ष डॉ संजीव कुमार सिरमौर की मरिमामयी उपस्थिति थी। राज्य के विभिन्न जिलों से पशुपालन 20 नये प्रगतिशील व्यवसायियों/किसानों के साथ साथ कामधेनु विश्वविद्यालय के अध्यापक, विभागीय अधिकारी एवं विश्वविद्यालय के छात्र – छात्राये उपस्थित थे ।
प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने वाले डॉ. तरूण रामटेके जिला पशु चिकित्सालय राजनांदगाव पदस्थ पशुओं के टीकाकरण, रोग नियंत्रण, नस्ल सुधार और पशुपालकों को जागरूक करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनके द्वारा लगभग 200 छोटे और बड़े पशुओं का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। प्रसव पीड़ा से गुजर रहे पशुओं को तत्काल ऑपरेशन कर बछड़ा और मां दोनों की जान सुरक्षित करने । इसके कारण अब पशुपालकों को ऑपरेशन के लिए शहर से बाहर नहीं जाना पड़ता।
इस अवसर पर डॉ. तरूण रामटेके ने कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि उन सभी पशुपालक भाइयों का है जिनके सहयोग से हम पशु सेवा के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर पा रहे हैं। पशु चिकित्सक के रूप में हमारा दायित्व है कि स्वस्थ पशु, सुरक्षित भोजन और मजबूत किसान के लक्ष्य को पूरा करें।”
डॉ. रामटेके ने आगे बताया कि प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह के चौथे शनिवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस 25 अप्रैल को पशु चिकित्सक ‘भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक’ थीम के साथ मनाया जा रहा है। पशु चिकित्सक केवल पशुओं के उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के भी महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। पशुओं का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे दूध, अंडा और मांस उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। पशु चिकित्सक न केवल बीमार पशुओं का इलाज करते हैं, बल्कि नियमित टीकाकरण के माध्यम से रोगों की रोकथाम भी करते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।



