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संस्कारधानी का गौरव : राजनांदगांव की सुष्मिता सिंह का भारतीय वन सेवा में चयन…

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यूपीएससी आईएफएस-२025 में हासिल की देशभर में 32वीं रैंक, पिता के पदचिह्नों पर चलकर पाई सफलता

राजनांदगांव (दावा)। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा शुक्रवार शाम जारी की गई भारतीय वन सेवा परीक्षा 2025 की अंतिम चयन सूची में राजनांदगांव की सुष्मिता सिंह ने बड़ी सफलता हासिल की है। कुल चयनित 148 अभ्यर्थियों में सुष्मिता ने देशभर में 32वां स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।

देहरादून से बीटेक और फिर सिविल सेवा
सुष्मिता की प्रारंभिक शिक्षा शहर के जेएमजे नवजीवन स्कूल और रॉयल किड्स स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने जैन इंटरनेशनल स्कूल बिलासपुर और डीपीएस भिलाई से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वे देहरादून गईं, जहाँ यूपीईएस से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद उन्होंने एक वर्ष तक नौकरी भी की। लेकिन प्रशासनिक सेवा में जाने के लक्ष्य के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह सिविल सेवा की तैयारी में जुट गईं।

पिता के विरासत को बढ़ाया आगे
सुष्मिता के पिता बीपी सिंह स्वयं भारतीय वन सेवा के प्रतिष्ठित अधिकारी रहे हैं। उन्होंने एसडीओ से लेकर मुख्य वन संरक्षक (ष्टष्टस्न) के पद पर रहते हुए दुर्ग वृत्त सहित विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। सुष्मिता ने अपने पांचवें प्रयास में इस कठिन परीक्षा को पास कर अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया है।

सफलता का मंत्र : कड़ी मेहनत और परिवार का साथ
अपनी सफलता का श्रेय सुष्मिता ने अपनी माता की प्रेरणा और पिता के मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने कहा कि यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में सफलता के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता, परिवार का अटूट समर्थन और ईश्वर की कृपा अत्यंत आवश्यक है। उनकी इस उपलब्धि पर नगर के गणमान्य नागरिकों और इष्ट मित्रों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

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