वित्त विभाग के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी पैसे की बर्बादी को रोकना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर व सीमित इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
⚡ मंत्रियों का काफिला छोटा होगा, EV गाड़ियों पर रहेगा जोर
नई गाइडलाइन के मुताबिक, मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्षों व अधिकारियों के काफिले में अब सिर्फ बेहद जरूरी गाड़ियां ही दौड़ेंगी। सुरक्षा और प्रोटोकॉल के नाम पर होने वाली गाड़ियों की फिजूलखर्ची पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बदला जाएगा।
🚗 अफसर अब ‘पूलिंग सिस्टम’ से आएंगे ऑफिस
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्च और बजट को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों के लिए ‘वाहन पूलिंग’ लागू कर दी गई है। अब एक ही विभाग या एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारी अलग-अलग सरकारी गाड़ियों के बजाय एक ही वाहन का इस्तेमाल करेंगे।
✈️ विदेश यात्राओं पर ‘नो एंट्री’, CM की मंजूरी होगी जरूरी
अधिकारियों और कर्मचारियों की सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। बहुत ही विशेष और जरूरी परिस्थितियों को छोड़कर किसी को भी विदेश जाने की अनुमति नहीं होगी। यदि यात्रा राज्य हित में बेहद जरूरी है, तो इसके लिए सीधे मुख्यमंत्री की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
💻 बैठकें होंगी ऑनलाइन, पेपरलेस होगा कामकाज
महीने में सिर्फ एक फिजिकल बैठक: नियमित और समीक्षा बैठकें अब आमने-सामने बैठने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। फिजिकल बैठकें महीने में सिर्फ एक बार ही बुलाई जा सकेंगी।
ई-ऑफिस पर फोकस: दफ्तरों में कागज की फाइलों, भारी-भरकम स्टेशनरी और बुकलेट्स की जगह पूरी तरह डिजिटल फाइलों (e-Office) का इस्तेमाल किया जाएगा।
डिजिटल ट्रेनिंग: कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए अब केवल iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
💡 ऑफिस टाइम खत्म होते ही बंद होंगे AC और लाइट
सरकारी दफ्तरों में बिजली की बर्बादी रोकने के लिए भी सख्ती बढ़ा दी गई है। अब कार्यालय का समय खत्म होते ही सभी लाइटें, पंखे, कंप्यूटर और एसी (AC) को अनिवार्य रूप से बंद करना होगा। लापरवाही बरतने वाले विभागों और प्रभारियों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।



