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सोमनी मामले में बड़ी गाज : थाना प्रभारी निरीक्षक अरुण नामदेव और महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह तत्काल प्रभाव से निलंबित…

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राजनांदगांव (दावा)। जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में बीमार नाबालिग बालिका को कथित रूप से गर्भवती बताने और उसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा की गई प्रताडऩा के मामले में जिला पुलिस कप्तान ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कर्तव्य में घोर लापरवाही, असंवेदनशीलता और विभागीय प्रोटोकॉल के उल्लंघन के गंभीर मामले में सोमनी के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार नामदेव और महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस बड़ी कार्रवाई से पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया है। आधिकारिक आदेश के अनुसार बीते 25 मई को थाना सोमनी में पीडि़त नाबालिग बालिका को उसके परिवार के साथ रात में संवेदना कक्ष में रखा गया था। इस दौरान थाना परिसर में तैनात महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह द्वारा पीडि़त नाबालिग बालिका के साथ बेहद असंवेदनशील और अभद्र व्यवहार किया गया।

संवेदना कक्ष में असंशीलता पड़ी भारी, एसपी ने जारी किया आदेश
मामले की गंभीरता और मानवाधिकारों व बाल अधिकारों के खुले उल्लंघन को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर निलंबन की यह गाज गिरी है। जिसमें निरीक्षक अरुण कुमार नामदेव तत्कालीन थाना प्रभारी सोमनी (हाल रक्षित केंद्र राजनांदगांव) को पर्यवेक्षीय लापरवाही के लिए सस्पेंड किया गया है। वहीं महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह थाना सोमनी में पदस्थ रहते हुए नाबालिग से दुव्र्यवहार के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) राजनांदगांव संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारी (निरीक्षक अरुण कुमार नामदेव एवं महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह) सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। निलंबन काल में दोनों को नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

चौतरफा राजनैतिक व सामाजिक दबाव के बाद हुई कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि सोमनी क्षेत्र की इस घटना को लेकर पिछले कुछ दिनों से समूचे राजनांदगांव जिले सहित प्रदेश भर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं। विभिन्न राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने रात भर नाबालिग को थाने में रखने और पुलिसिया प्रताडऩा को लेकर जिला प्रशासन व सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। मामले में चौतरफा घिरने के बाद पुलिस विभाग ने यह त्वरित दंडात्मक कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि आम नागरिकों, महिलाओं और विशेषकर बच्चों के साथ किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की असंवेदनशीलता या बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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