किसान पुआल या पैरा में आग न लगाएं- बन सकता है दावानल
डोंगरगांव (दावा)। शनिवार शाम शहर के मटिया से करियाटोला मार्ग पर खेतों में लगी आग दावानल की तरह फैलने से पूरे शहर में सनसनी फैल गई. 30 मई को इस क्षेत्र के एक खेत में किसी किसान ने धान कटाई के बाद खेत में फैले पैरा में आग लगाया था, जो शाम की तेज आंधी के चलते कई खेतों में फैलकर भयावह हो गई. आंधी-तूफान के बीच इन खेतों के किसानों को आग लगने की खबर लगी, जिसके बाद आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की सुध आयी. इधर आग का दायरा आगे बढऩे से रोकने के लिए के लिए प्रकाश, प्रेम पटेल, प्रेम गोस्वामी सहित अन्य किसान लगे रहे लेकिन हवा की रफ्तार के चलते आग तेजी से फैलती रही और अनेक खेतों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे बड़ी मात्रा में पशुओं का चारा जलकर खाक हो गया. इस दौरान मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी और सिद्दीक बडग़ुजर ने एबीस से फायर ब्रिगेड बुलवाया. साथ ही नगर पंचायत की ओर से टेंकर में पानी भरकर मौके पर पहुंचा, तब जाकर जैसे तैसे देर रात्रि आग को काबू पाया गया. इस पूरे ऑपरेशन में नगर पंचायत टेंकर के साथ पहुंचे कोमल रगड़े और सोनू साहू और एबीस की ओर से पहुंचे फायर ब्रिगेड में दीपक यादव, विमल साहू ड्रायवर, लक्ष्मण साहू का भरपूर योगदान रहा.
खेतों में आग न लगाएं किसान
क्षेत्र में धान का फसल बहुतायात मात्रा में लगाया जाता है और फसल कटाई के बाद खेत में बचे पुआल या पैरा को पशुओं के चारा के लिए इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब किसान इस सूखे चारा को खेत में ही आग लगाने लगे हैं, जिससे हर तरफ नुकसान देखने मिल रहा है. वहीं आग फैलने के बाद रिहायशी इलाकों में भी फैलने का डर हमेशा बना रहता है. फिर चाहे पर्यावरण का नुकसान हो या फिर इस तरह तेज आंधी तूफान में अनियंत्रित होकर चारों ओर आग फैलने से होने वाला नुकसान. सबसे बड़ी परेशानी बिजली बंद होने के बाद फायरब्रिगेड की गाड़ी के अलावा किसी भी प्रकार से आग बुझाने का कोई रास्ता नहीं बचता ऐसे में आग फैलने पर किसानों के मोटर, पंप, खड़ी फसल सहित अनेक नुकसान सामने आते हैं. शासन-प्रशासन की ओर से खेतों में आग लगाने को लेकर लगातार समझाईस भी दी जाती है किन्तु इस पर लगाम नहीं लगाया जा सका है जबकि इस समस्या का हल ग्राम स्तर पर ही पाबंदी और जुर्माना लगाकर भी किया जा सकता है.



