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अपने आईएएस बनने का लक्ष्य दीवारों पर लिखें, जो आपको संकल्प याद दिलाए — डॉ. रमन सिंह…

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यूपीएससी 2025 के टॉपर्स ने राजनांदगांव में साझा किए सफलता के मंत्र, जिला प्रशासन का ऐतिहासिक मार्गदर्शन कार्यक्रम संपन्न

राजनांदगांव (दावा)। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, क्षमता और संभावनाओं को सही दिशा प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन राजनांदगांव द्वारा पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में एक अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह शामिल हुए। समारोह में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 2025 की परीक्षा में देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले चयनित अभ्यर्थियों ने अंचल के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ सीधे संवाद कर अपने अनुभव साझा किए।

असफलता को चुनौती मानकर जीत की तैयारी करें : विस अध्यक्ष
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, गहरी सोच और असीम धैर्य की आवश्यकता होती है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि विद्यार्थी अपने अध्ययन कक्ष की दीवारों पर लिखें कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनना है। प्रतिदिन सुबह उठकर इस संकल्प को देखने से मन में अटूट विश्वास जाग्रत होगा। डॉ. सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, अब्राहम लिंकन और जे.के. रोलिंग्स का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती असफलताओं से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें चुनौती मानकर आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के चयनित अभ्यर्थी संजय डहरिया की सराहना करते हुए कहा कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझते हुए यूपीएससी क्रैक करना उनकी अद्भुत जीवटता का जीवंत उदाहरण है।

जिले के आला प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने दी सीख
पुलिस महानिरीक्षक बालाजी राव ने कहा कि यूपीएससी की तैयारी का दौर अनिश्चितताओं से भरा होता है। ऐसे समय में एकाग्रचित होकर पढ़ाई करें और अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत रखें। यही प्रक्रिया आपको दूरदर्शिता पूर्ण निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने कहा कि ग्रामीण परिवेश के युवाओं ने सीमित संसाधनों के बीच नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। केवल अंधाधुंध मेहनत काफी नहीं है, सही रणनीति के साथ अध्ययन करें। एक सकारात्मक पंक्ति भी इंसान का जीवन बदल सकती है। पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में तो सभी सफल हो जाते हैं, लेकिन असली योद्धा वही है जो प्रतिकूलताओं को चीरकर विजय प्राप्त करता है। जेहन में हमेशा यह बात रखें कि किसी भी काम को करने वाला कोई न कोई पहला इंसान होता है, तो वह आप क्यों नहीं हो सकते? वनमंडलाधिकारी आयुष जैन ने बताया कि उनके पिता की प्रेरणा से उन्होंने आईएफएस की राह चुनी। प्रकृति के सानिध्य में देश सेवा करना एक अद्भुत सौभाग्य है।

देश के टॉपर्स ने डिजिटल मंच से बताए सफलता के गुप्त सूत्र
अनुज अग्निहोत्री (ऑल इंडिया रैंक-1): सिविल सेवा में आने के पीछे आपका क्यों और कैसे पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए। एक डॉक्टर होने के नाते मैंने निरंतर प्रयास किया और तीसरे प्रयास में सफलता पाई। कठिन परिश्रम, अनुशासन, सत्यनिष्ठा और आत्मविश्वास ही इस परीक्षा की असली चाबी हैं। राघव झुनझुनवाला (ऑल इंडिया रैंक-4): तैयारी के दौरान हमेशा अनुशासन का चयन करें, प्रेरणा का नहीं, क्योंकि प्रेरणा अस्थायी होती है। रियल टाइम में खुद को अपग्रेड करते रहें। करियर चयन के प्रति हमेशा ईमानदार रहें। दिशांत निसार (ऑल इंडिया रैंक-19): गुजरात के कच्छ से होने के कारण मैंने कौशल विकास और कृषि के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम किया, जिससे मुझे काफी मदद मिली। छात्रों को एक बात ध्यान रखनी चाहिए कि चैट जीपीटी या एआई पर अत्यधिक निर्भरता से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। एआई के माध्यम से पूरी तैयारी नहीं की जा सकती, इसलिए केवल चुनिंदा और प्रामाणिक किताबों से ही अध्ययन करें। वैभवी अग्रवाल (ऑल इंडिया रैंक-35)-सुशमिता सिंह (ऑल इंडिया रैंक-32): वैभवी ने डेली रूटीन और अनुशासन पर जोर देते हुए मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मॉर्निंग वॉक और स्वयं के नोट्स बनाने की सलाह दी। वहीं सुष्मिता सिंह ने बताया कि करंट अफेयर्स के लिए नियमित समाचार पत्र पढऩा, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करना और मॉक टेस्ट देना सबसे ज्यादा मददगार साबित होता है। दर्शना सिंह बघेल (आईआईटी कानपुर, चयनित): सही तरीके से पढ़ाई करने के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म प्लान होना चाहिए। आगामी छह माह का एडवांस टाइम-टेबल बनाएं और तनाव मुक्त रहने के लिए हॉबी (शौक) को जिंदा रखें।

बीमारी को हराने वाले और ग्रामीण अंचल के नायकों की जुबानी
संजय डहरिया (रैंक-946): महासमुंद के ग्राम बेलटुकरी के रहने वाले संजय ने बताया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के कारण एक समय मन में ख्याल आया कि जिंदगी रहेगी या नहीं। लेकिन जब आप किसी समस्या को अंदर से जीत लेते हैं, तो बाहर भी जीत जाते हैं। उन्होंने अर्जुन सिसोदिया की पंक्तियां साझा कीं: “युद्ध नहीं जिनके जीवन में वे भी बहुत अभागे होंगे, या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण से भागे होंगे। अजय गुप्ता (रैंक-452): रायगढ़ के ग्रामीण परिवेश से निकले अजय ने कहा कि यह परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्णय लेने के कौशल की परीक्षा है। कॉलेज के आयोजनों में सक्रिय भाग लेने से आत्मविश्वास बढ़ता है। एम. भार्गव (एसडीएम डोंगरगढ़): उन्होंने कहा कि पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी उनका चयन नहीं हुआ था, लेकिन धैर्य से सफलता मिली। विद्यार्थियों को अपने सीमित दायरे से बाहर निकलकर नए परिवेश से जुडऩा चाहिए। जिससे सोच व्यापक होती है।

जिज्ञासाओं का हुआ समाधान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक विशेष प्रश्नोत्तरी (क्त&्र) सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित विद्यार्थियों और युवाओं ने सीधे सफल अधिकारियों से अपनी शंकाओं और भ्रांतियों को लेकर सवाल पूछे, जिनका टॉपर्स ने बेहद आत्मीयता से जवाब दिया। इस गौरवशाली अवसर पर महापौर मधुसूदन यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष सचिन बघेल, राजगामी संपदा न्यास की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा साहू, जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, प्रशिक्षु आईपीएस श्रीमती वैशाली जैन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पालक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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