0 जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से बढ़ी परेशानी, बरसात में हालात हुए बदतर
0 तस्वीरें बयां कर रही देवपुरा की बदहाल सडक़ की कहानी, गड्ढों और कीचड़ के बीच आवागमन को मजबूर ग्रामीण
गंडई-पंडरिया (दावा)। नगर से लगे ग्राम पंचायत देवपुरा के ग्रामीण आज भी सडक़ जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। गांव की बस्ती के भीतर की सडक़ वर्षों से जर्जर अवस्था में है, जिससे ग्रामीणों, स्कूली बच्चों तथा राहगीरों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोग खस्ताहाल सडक़ पर जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को विवश हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से सडक़ निर्माण की मांग लगातार की जाती रही है। बावजूद इसके आज तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। विगत तीन दशकों से ग्रामीण सडक़ निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से इस ओर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
बरसात में सडक़ बनी दलदल, बढ़ा हादसों का खतरा
मानसून की शुरुआत के साथ ही देवपुरा की कच्ची मुरम सडक़ की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। बारिश का पानी भरने से पूरी सडक़ दलदल में तब्दील हो गई है तथा जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। सडक़ पर फिसलन बढऩे से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में आए दिन लोगों के फिसलकर चोटिल होने का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार इसी मार्ग से स्कूली बच्चे, किसान, महिलाएं तथा अन्य राहगीर प्रतिदिन आवागमन करते हैं। खराब सडक़ के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सडक़ निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
सडक़ पर जलभराव से बढ़ी परेशानी
बरसात के बाद सडक़ पर जगह-जगह पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। बड़े-बड़े गड्ढों में जमा पानी के कारण राहगीरों को यह तक पता नहीं चल पाता कि गड्ढे कितने गहरे हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। कई बार लोग कीचड़ और फिसलन के कारण गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।
स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का आना-जाना लगा रहता है। कीचड़ और फिसलन के कारण हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल पहुंचने तथा बुजुर्गों को दैनिक कार्यों के लिए बाहर निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
घरों के सामने पसरी अव्यवस्था, बीमारी फैलने की आशंका-
सडक़ की बदहाली के कारण घरों के सामने कीचड़ और गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे मच्छरों के पनपने और संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
तीन दशक से सिर्फ आश्वासन, नहीं मिला समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि बीते 30 वर्षों में कई सरपंच और जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन किसी ने भी सडक़ निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी। चुनाव के समय सडक़ बनवाने के वादे जरूर किए गए, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया। परिणामस्वरूप आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं। हाल ही में ग्रामीणों ने बदलाव की उम्मीद के साथ महिला युवा नेतृत्व को ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी है। ग्रामीणों को नई पंचायत से जनहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे के समाधान की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि वर्षों से बदहाल पड़ी देवपुरा की सडक़ की तस्वीर बदलती है या फिर ग्रामीणों को आगे भी इसी समस्या से जूझना पड़ेगा।
पक्की सडक़ निर्माण की मांग तेज
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द सीसी रोड अथवा डामरीकरण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही सडक़ निर्माण नहीं कराया गया तो ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
उच्च स्तर पर भेजे गए प्रस्तावों पर नहीं हो रही कार्रवाई
ग्राम पंचायत देवपुरा की सरपंच जोगेश्वरी नारद साहू ने बताया कि गांव की इस जर्जर सडक़ के निर्माण के लिए पंचायत द्वारा प्रस्ताव तैयार कर जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत को भेजा गया है। इसके अलावा सुशासन तिहार के दौरान दो बार आवेदन प्रस्तुत करने के साथ ही मंत्रालय स्तर तक भी लिखित रूप से मांग की गई है। इसके बावजूद अब तक सडक़ निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। सरपंच जोगेश्वरी नारद साहू ने कहा कि इस सडक़ को बनाने के लिए पंचायत में प्रस्ताव बनाकर जनपद पंचायत, जिला पंचायत, सुशासन तिहार में दो बार तथा मंत्रालय तक लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन इस ओर उच्च अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


