पहली ही बारिश में धंसा 26 करोड़ का ओवरब्रिज, कलेक्टर के कड़े पत्र के बाद हरकत में आया रेलवे प्रबंधन, डीआरएम बोले: तकनीकी खामी मिली तो होगी सख्त कार्रवाई
राजनांदगांव (दावा)। डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बरगा के समीप नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज में पहली ही बारिश में आई 10 इंच से बड़ी और भयानक दरारों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अंचल के लोकप्रिय समाचार पत्र दैनिक दावा द्वारा रविवार 5 जुलाई के अंक में बरगा व आलीवारा में नव-निर्मित रेल्वे ओवर ब्रिज में आई भयानक दरारें, घटिया निर्माण की खुली पोल शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासनिक और रेलवे महकमे में हडक़ंप मच गया है। खबर का बड़ा असर यह हुआ कि एक ओर जहां राजनांदगांव कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे को उच्च स्तरीय जांच के लिए सख्त पत्र लिखा, वहीं दूसरी ओर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) स्वयं जमीनी हकीकत और निरीक्षण के लिए राजनांदगांव पहुंच गए।
डीआरएम से दैनिक ‘दावा’ के तीखे सवाल, मिला कार्रवाई का भरोसा
राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान दैनिक दावा के प्रतिनिधि ने डीआरएम से सीधा सवाल किया कि— करोड़ों की लागत से बने इस रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में ठेकेदार द्वारा साफ तौर पर लापरवाही बरती गई है, क्या रेलवे विभाग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा? इस तीखे सवाल का जवाब देते हुए डीआरएम ने कहा कि हमारे लिए यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। चाहे वह ट्रेन में सफर करने वाले रेल यात्री हों या ओवरब्रिज मार्ग (सडक़) से गुजरने वाले आम नागरिक। हमारी तकनीकी टीम को एक बार इसका विस्तृत और पूर्ण निरीक्षण करने दीजिए। यदि तकनीकी परीक्षण में कुछ भी गलत पाया जाता है या निर्माण में गुणवत्ता की कमी निकलती है, तो निश्चित रूप से उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तय है।
उद्घाटन के कुछ सप्ताह बाद ही जर्जर हुआ ब्रिज
इस बहुप्रतीक्षित ओवरब्रिज की बदहाली को लेकर क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश की स्थिति है। ग्रामीणों का आरोप है कि जून महीने में ही जनता को समर्पित किए गए इस ब्रिज में पहली तेज बारिश होते ही बीचों-बीच 10 इंच से चौड़ी दरारें आ गई हैं। पुल देखने से ऐसा लग रहा है मानो दो हिस्सों में अलग हो रहा हो, जिससे किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है। बरगा के साथ-साथ आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज की गुणवत्ता भी मटियामेट हो चुकी है। यहां एप्रोच रोड के नीचे बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और पुल के किनारे (एज) धंसने लगे हैं।
कलेक्टर की पहल से न्याय की उम्मीद
यह ओवरब्रिज क्षेत्र के दर्जनों गांवों के आवागमन की लाइफलाइन है। महज कुछ हफ्तों में पुल की यह जर्जर हालत निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर भ्रष्टाचार के सवालिया निशान खड़े करती है। बहरहाल, दैनिक दावा द्वारा इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और कलेक्टर की सख्ती के बाद खुद डीआरएम के मैदान में उतरने से ग्रामीणों को उम्मीद बंधी है कि अब इस घटिया निर्माण की निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदार सलाखों के पीछे होंगे।



