जिपं सदस्य प्रशांत कोड़ापे की मौजूदगी में परिजनों ने दर्ज कराई रिपोर्ट, रेलवे ने पल्ला झाड़ा, ग्रामीण बोले- अधिकारियों का संरक्षण
डोंगरगढ़ (दावा)। बोरतलाव क्षेत्र में मुरूम के गहरे गड्ढे (डबरी) में भरे पानी में डूबने से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। इस हृदय विदारक घटना के बाद क्षेत्र के आदिवासियों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। जिला पंचायत सदस्य प्रशांत कोड़ापे की अगुवाई में पीडि़त परिजनों और ग्रामीणों ने बोरतलाव थाने पहुंचकर अवैध उत्खनन करने वाले रेलवे ठेकेदार, उन्हें मूक संरक्षण देने वाले माइनिंग विभाग के उच्च अधिकारियों सहित अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के सख्त निर्देश पर थाना प्रभारी ने तत्काल प्रभाव से भादंवि की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर मामले को विस्तृत विवेचना में ले लिया है। इसके पूर्व घटनास्थल पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों को परिजनों और जनप्रतिनिधियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने एक सुर में आरोप लगाया कि माइनिंग विभाग की मिलीभगत से रेलवे ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रखकर यहां मौत का कुआं खोद डाला था। जो मासूमों की मौत का कारण बना।
रेलवे ने झाड़ा पल्ला : कहा- घटना से हमारा कोई लेना-देना नहीं
एक तरफ जहां पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं दूसरी ओर रेलवे के उच्च अधिकारियों ने अपने ठेकेदार को बचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। दैनिक समाचार पत्र प्रिंट मीडिया को जारी एक आधिकारिक स्पष्टीकरण पत्र में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं पीआरओ दिलीप सिंह ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चल रही खबरें भ्रामक हैं। रेलवे प्रशासन के मुताबिक जिस स्थल पर यह दुखद हादसा हुआ है। वह रेलवे की भूमि या परिक्षेत्र का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक निजी भूमि है। जो रेलवे ट्रैक से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अत: इस घटना का भारतीय रेलवे के किसी निर्माण कार्य या रेलवे ठेकेदार से कोई संबंध नहीं है। रेलवे ने छवि धूमिल होने की बात कहते हुए मीडिया से अधिकृत तथ्यों पर ही समाचार प्रकाशित करने का अनुरोध किया है।
परिजनों का आरोप- यह खुली हत्या है
बोरतलाव थाने में दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के अनुसार, ग्राम बोरतलाव निवासी राजू मंडावी (59) ने बताया कि उनके पोते दानिश मंडावी (7 वर्ष) और कृष मंडावी (8 वर्ष) अपने पड़ोसी हितेश कोकाटे (5 वर्ष) के साथ 15 जुलाई को घर से निकले थे। शाम को राजू कोडबती के खेत के पास स्थित मुरूम के गहरे गड्ढे के किनारे बच्चों के कपड़े मिले। जिसके बाद पानी से तीनों के शव बरामद हुए। शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि रेलवे की तीसरी लाईन के निर्माण के दौरान ठेकेदार ने यहां से भारी मात्रा में मुरूम निकाली और बिना समतलीकरण व सुरक्षा घेरे के इसे लावारिस छोड़ दिया। जिससे यह खतरनाक जलाशय बन गया।
विरोध करने वाले पंच-सरपंचों पर ही करा दी थी एफआईआर
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष रेलवे के पेटी ठेकेदारों के काले कारनामों को उजागर करते हुए बताया कि इस अवैध उत्खनन के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं। जब प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुईं। इससे बौखलाए दबंग ठेकेदारों ने जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत के उपसरपंच व पंचों के खिलाफ 2 लाख रुपये की झूठी उगाही का आरोप मढक़र पुलिस के सहयोग से फर्जी एफआईआर दर्ज करा दी थी और जेल भेजने की धमकियां दी थी।
समतलीकरण के नाम पर 50 से अधिक किसानों की जमीन पर डाका
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे की तीसरी लाइन निर्माण कार्य में लगे पेटी ठेकेदारों ने बोरतलाव क्षेत्र में बिना ग्राम पंचायत की अनुमति के किसानों की जमीन को समतल करने का झांसा देकर 50 से अधिक गरीब किसानों की भूमि से धड़ल्ले से अवैध उत्खनन किया है। क्षेत्र में जगह-जगह खोदे गए ये गहरे गड्ढे अब इंसान और मवेशियों दोनों के लिए काल बन चुके हैं।
मुआवजा और सजा मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई
सभापति व सदस्य, जिला पंचायत प्रशांत कोड़ापे ने कहा कि तीन मासूम आदिवासी बच्चों की मौत एक प्रशासनिक और ठेकेदारी तंत्र की क्रूरता का नतीजा है। मैंने पीडि़तों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया है। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा कर पीडि़त परिवारों को तत्काल प्रभाव से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जब तक दोषी रेलवे ठेकेदार, माइनिंग अफसर और भ्रष्ट तंत्र के चेहरों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता। तब तक हमारी यह लड़ाई थमेगी नहीं।



