रायपुर: मिल्क पाउडर और पाम ऑयल के इस्तेमाल से तैयार किए जाने वाले ‘एनालॉग पनीर’ और अन्य नकली दुग्ध उत्पादों के खिलाफ छत्तीसगढ़ शासन ने सख्त रुख अपनाया है। पनीर के अलावा मक्खन और दही पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत इन उत्पादों पर फिलहाल एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
कारोबारियों को आदेश की भनक पहले ही लग चुकी थी, जिसके चलते पिछले तीन-चार दिनों से प्रदेश की लगभग डेढ़ दर्जन फैक्ट्रियों में इनका उत्पादन रोक दिया गया था। राजधानी रायपुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने शनिवार को प्रमुख फर्मों—जैसे भाठागांव का मेसर्स केएलपी, निमोरा का एसजे डेयरी प्रोडक्ट्स, बीरगांव का मेसर्स कांशी एग्रो और श्री सावरिया सेठ मिल्क प्रोडक्ट्स—का औचक निरीक्षण किया। हालांकि, शुरुआती जांच में इन फर्मों में एनालॉग उत्पादों का निर्माण या भंडारण नहीं पाया गया।
जमाखोरी और बाजार पर असर
बाजार जानकारों के अनुसार, एनालॉग उत्पादों की बिक्री बंद होने से अब असली पनीर और दूध से बने शुद्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिससे इनकी कीमतों में उछाल आने के पूरे आसार हैं। इसके अलावा, होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड सेंटरों (विशेषकर पावभाजी और फास्ट फूड विक्रेताओं) द्वारा सस्ते एनालॉग मक्खन और पनीर की जमाखोरी किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है, जिस पर खाद्य विभाग की पैनी नजर है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति या फर्म प्रतिबंधित वस्तुओं के निर्माण या बिक्री में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत बेहद कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।



