आए दिन हो रहे दर्दनाक हादसे-मवेशी तस्कर भी उठा रहे हैं लाभ
सडक़ों पर बेखौफ घूमते मवेशी, जान हथेली पर रखकर चल रहे राहगीर
शहर से गुजरने वाले स्टेट हाईवे पर दिन ढलते ही मवेशियों का झुंड जमा हो जाता है। रात के समय अंधेरे और तेज रफ्तार के कारण वाहन चालक इन मवेशियों से टकराकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इन हादसों में न केवल बेजुबान मवेशियों की जान जा रही है, बल्कि कई दोपहिया व चार पहिया वाहन चालक भी गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं या जान गंवा रहे हैं। वहीं रात में हादसों को रोकने के लिए मवेशियों के सींगों पर रेडियम या रिफलेक्टर लगाने की मुहिम भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
सरकारी योजनाओं के बाद भी धरातल पर संकट
पूर्व में संचालित गौठान योजनाएं हों या वर्तमान प्रशासन की गौशाला व्यवस्था, जमीनी हकीकत यह है कि मवेशी आश्रय स्थलों की जगह सडक़ों पर खुलेआम घूम रहे हैं। इसके पूर्व राज्य सरकार ने अनेक ग्रामों में गौठानों का निर्माण भी करवाया था, किन्तु लाखों रूपये बरबाद करने के बाद आज तक इन गौठानों का कोई उपयोग नहीं लिया जा रहा है और न ही इन गौठानों की अब कोई उपयोगिता बची है।
डोंगरगांव (दावा)। छत्तीसगढ़ में सत्ता और सियासी चेहरे बदल गए, लेकिन सडक़ों पर आवारा मवेशियों (गौवंश) की गंभीर समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। राज्य के स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे और प्रमुख संपर्क मार्गों पर बीच सडक़ डेरा जमाए बैठे मवेशी आए दिन भीषण सडक़ दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार की गौधाम योजना भी धरातल पर कहीं दिखाई नहीं दे रही है। जिसके चलते गोवंशों की दुर्दशा हो रही है। गोवंशों के व्यवस्थापन नहीं होने के चलते इन सडक़ों पर अपना डेरा जमाए हुए हैं। जिससे उन्हें नुकसान होता ही है। साथ ही हजारों रूपये टेक्स और चलान के बावजूद वाहन चालक भी दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। फिलहाल राजनांदगांव से लेकर डोंगरगांव में अंबागढ़ चौकी तक स्टेट हाईवे में दिन-रात मवेशी सडक़ों पर बैठे रहते हैं। रात्रि में डोंगरगांँव की सडक़ अघोषित गौठान बन चुका है और स्टेट हाईवे में चलने वाले वाहन चालक मशक्कत करते दिख जाते हैं। वर्तमान में बारिश का मौसम है। ऐसे में सडक़ में बैठे मवेशी और उनके अचानक दौडऩे की वजह से दुघटनाएं भी बढ़ रही हैं। गोवंशों के मालिकों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी के चलते सडक़ों पर बैठे इन गौवंशों को मवेशी तस्कर भी अपना शिकार बना रहे हैं। जिसका उदाहरण डोंगरगाँव शहर में ही मिल चुका है। दुग्ध उत्पादन बंद होने या नर मवेशियों को कई पशुपालक खुले में छोड़ देते हैं। जिन पर कोई ठोस प्रशासनिक जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं होता। वहीं अनेक ग्रामों में अवैध कब्जों के चलते चारागाह को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। जिसके चलते पशु पालकों को खासा परेशानी उठाना पड़ रहा है। इधर ग्रामीणोंं की मानें तो अब चरवाहों की भी कमी है। पीढ़ी दर पीढ़ी चरवाहे का कार्य करने वाले परिवारों में पढ़ा लिखा युवा अब पशुओं को चराने का काम ही नहीं करना चाहता। जिससे पशुपालकों को गौवंशों को पालना काफी मुश्किल भरा है। जिसके चलते अनेक ग्रामीण पशुओं को डोंगरगांव शहर की सरहद में छोड़ रहे हैं। जिससे शहर में पशुओं की भीड़ सी हो रही है।
हादसों के बढ़ते आंकड़ों के बावजूद स्थानीय नगर निकाय, पंचायत विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के बीच आपसी समन्वय की कमी साफ नजर आती है। जब तक आवारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने और लापरवाह पशुपालकों पर कड़ी कार्रवाई के कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सडक़ों पर यह जानलेवा सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। वहीं प्रदेश सरकार को इन गोवंशों के व्यवस्थापन और सुरक्षा को लेकर शीघ्र ही सकारात्मक कदम उठाना आवश्यक है। हिन्दू धर्म के विभिन्न संगठनों व्दारा गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए लगातार आवेदन निवेदन किया जा रहा है, ताकि इनकी दशा सुधारी जा सके और गौवंशों को पूर्ण सुरक्षा प्राप्त हो सके, लेकिन इस दिशा में भी सरकार फेल नजर आ रही है।



