प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल, मनमोहक श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
छुईखदान। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नगर में श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच धूमधाम से मनाया गया। जन्माष्टमी को लेकर नगर के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिरों में सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी के विशेष श्रृंगार किए गए। नगर के लक्ष्मी नारायण रानी मंदिर, राधा कृष्ण बाई साहब मंदिर, राम मंदिर, जगन्नाथ मंदिर सहित अन्य प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मंदिरों में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार एवं नगर की सुख-समृद्धि की कामना की। कई मंदिरों में भजन-कीर्तन के आयोजन हुए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
राधा-कृष्ण के श्रृंगार रहे आकर्षण का केंद्र
जन्माष्टमी के अवसर पर नगर के सभी प्रमुख मंदिरों में भगवान श्री राधा-कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया गया। अलग-अलग मंदिरों में भगवान के स्वरूपों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। राधा-कृष्ण जी के मनमोहक श्रृंगार को देखने और दर्शन करने के लिए श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे। मंदिरों की साज-सज्जा और धार्मिक वातावरण ने जन्माष्टमी के उत्साह को और बढ़ा दिया।
मध्यरात्रि में गूंजे जयकारे
रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिरों में आरती, पूजा-अर्चना और जयकारों का दौर शुरू हुआ। शंखनाद के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया। रात 12 बजे के बाद लक्ष्मी नारायण रानी मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ देखने को मिली। वहीं नगर के अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे और जन्मोत्सव में शामिल हुए।
राजमहल और प्राचीन मंदिरों ने कराया वृंदावन का एहसास
छुईखदान के ऐतिहासिक राजमहल में विराजमान राधा-कृष्ण जी के मंदिर में भी जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। राजमहल के आसपास स्थित नगर के प्राचीन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना और जन्माष्टमी के आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
राजमहल के चारों ओर स्थित प्राचीन मंदिर, मंदिरों में विराजमान राधा-कृष्ण के विभिन्न स्वरूप, आकर्षक श्रृंगार, भजन-कीर्तन और देर रात तक गूंजते श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच छुईखदान का नजारा ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो पूरा नगर वृंदावन धाम बन गया हो। श्रद्धालुओं के बीच भी जन्माष्टमी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
पूरे नगर में देर रात तक “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से नगर एवं क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान छुईखदान की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक भी देखने को मिली।



