कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जिस तरह पीएफ खाते के नियमों में ताबड़तोड़ बदलाव कर रहा है, किसी भी को आजकल इसे लेकर कंफ्यूजन हो सकती है. खासकर प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को जिनका रिटायरमेंट फंड पीएफ पर ही निर्भर करता है. ईपीएफओ ने हाल में एक और बदलाव किया, पीएफ खाते में कटौती की सीलिंग बढ़ाकर. सबसे ज्यादा कंफ्यूजन फ्रेशर्स को होती है कि आखिर उनकी सैलरी पर पीएफ कब कटेगा और अगर कंपनी पीएफ का पैसा नहीं जमा करती या नहीं काटती तो उन्हें कहां और कैसे शिकायत करनी चाहिए.
सबसे पहले तो यह समझ लीजिए कि आपकी सैलरी कितनी भी है, उस पर पीएफ जरूर काटा जाएगा. ईपीएफओ नियमों के तहत पीएफ काटने की कोई मिनिमम लिमिट नहीं है. हालांकि, इसकी मैक्सिमम लिमिट जरूर तय की गई है. मौजूदा नियमों के तहत पीएफ काटने की अधिकतम लिमिट 15 हजार रुपये है. हाल में इस लिमिट को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है. अभी इस पर मुहर नहीं लगी है, लेकिन एक बार यह प्रस्ताव लागू हो गया तो कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और पेंशन भी बढ़ जाएगी.
पीएफ की मिनिमम और मैक्सिमम लिमिट क्या है
ईपीएफओ ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पीएफ की मिनिमम लिमिट नहीं तय की है, जिसका मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर 5 हजार रुपये होता है तो उसका 12 फीसदी पीएफ काटा जाएगा और उसे 600 रुपये हर महीने पीएफ खाते में जमा करने होंगे. इसका मतलब है कि पीएफ काटने की कोई मिनिमम लिमिट नहीं है. पीएफ के नियम कहते हैं कि आपके खाते में जितनी राशि सैलरी से काटकर जमा की जाएगी, उतनी ही कंपनी को भी जमा करनी होगी.
ईपीएफओ ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पीएफ की मिनिमम लिमिट नहीं तय की है, जिसका मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर 5 हजार रुपये होता है तो उसका 12 फीसदी पीएफ काटा जाएगा और उसे 600 रुपये हर महीने पीएफ खाते में जमा करने होंगे. इसका मतलब है कि पीएफ काटने की कोई मिनिमम लिमिट नहीं है. पीएफ के नियम कहते हैं कि आपके खाते में जितनी राशि सैलरी से काटकर जमा की जाएगी, उतनी ही कंपनी को भी जमा करनी होगी.
पीएफ खाते में कितने पैसे जमा होंगे
पीएफ खाते का नियम कहता है कि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए को मिलाकर जो भी पैसा बनता है, उसका 12 फीसदी काटकर पीएफ खाते में डाला जाता है. इतना ही पैसा कंपनी भी कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है. इस तरह, देखा जाए तो कर्मचारी के बेसिक और डीए का कुल 24 फीसदी पैसा पीएफ खाते में डाला जाएगा. हालांकि, यह सारा पैसा सीधे आपके पीएफ अकाउंट में नहीं जाएगा, बल्कि कंपनी की ओर से डाली जाने वाली रकम का 8.66 फीसदी पैसा पेंशन फंड में डाला जाता है. कर्मचारी के हिस्से का पूरा 12 फीसदी पीएफ खाते में जाता है, जबकि नियोक्ता के हिस्से से भी 3.34 फीसदी पैसा पीएफ अकाउंट में डाला जाता है.
पीएफ खाते का नियम कहता है कि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए को मिलाकर जो भी पैसा बनता है, उसका 12 फीसदी काटकर पीएफ खाते में डाला जाता है. इतना ही पैसा कंपनी भी कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है. इस तरह, देखा जाए तो कर्मचारी के बेसिक और डीए का कुल 24 फीसदी पैसा पीएफ खाते में डाला जाएगा. हालांकि, यह सारा पैसा सीधे आपके पीएफ अकाउंट में नहीं जाएगा, बल्कि कंपनी की ओर से डाली जाने वाली रकम का 8.66 फीसदी पैसा पेंशन फंड में डाला जाता है. कर्मचारी के हिस्से का पूरा 12 फीसदी पीएफ खाते में जाता है, जबकि नियोक्ता के हिस्से से भी 3.34 फीसदी पैसा पीएफ अकाउंट में डाला जाता है.
क्या 15 हजार से ज्यादा सैलरी पर नहीं कटेगा पीएफ
पीएफ काटने की मिनिमम लिमिट भले नहीं है, लेकिन इसकी मैक्सिमम लिमिट जरूर है. अभी यह लिमिट 15 हजार रुपये तय की गई है. इस लिहाज से जिसकी बेसिक सैलरी 15 हजार है, उसके पीएफ खाते में हर महीने 1,800 रुपये जमा होंगे और इतने ही पैसे कंपनी की ओर से भी जमा किए जाएंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जिसकी बेसिक सैलरी 15 हजार रुपये से ज्यादा होगी, उसका पीएफ नहीं काटा जाएगा. उस पर भी पीएफ जरूर काटा जाएगा लेकिन इसकी लिमिट सिर्फ 15 हजार रुपये ही होगी. इसका मतलब है कि भले ही आपकी बेसिक और डीए मिलाकर 1 लाख ही क्यों न हो, आपके पीएफ में सिर्फ 1,800 रुपये ही जमा किए जाएंगे और इतने ही पैसे कंपनी भी जमा करेगी.
पीएफ काटने की मिनिमम लिमिट भले नहीं है, लेकिन इसकी मैक्सिमम लिमिट जरूर है. अभी यह लिमिट 15 हजार रुपये तय की गई है. इस लिहाज से जिसकी बेसिक सैलरी 15 हजार है, उसके पीएफ खाते में हर महीने 1,800 रुपये जमा होंगे और इतने ही पैसे कंपनी की ओर से भी जमा किए जाएंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जिसकी बेसिक सैलरी 15 हजार रुपये से ज्यादा होगी, उसका पीएफ नहीं काटा जाएगा. उस पर भी पीएफ जरूर काटा जाएगा लेकिन इसकी लिमिट सिर्फ 15 हजार रुपये ही होगी. इसका मतलब है कि भले ही आपकी बेसिक और डीए मिलाकर 1 लाख ही क्यों न हो, आपके पीएफ में सिर्फ 1,800 रुपये ही जमा किए जाएंगे और इतने ही पैसे कंपनी भी जमा करेगी.
कैसे पता करें कि कंपनी काट रही पीएफ
हर कंपनी अपने कर्मचारी को सैलरी स्लिप देती है, जिस पर आपका पीएफ अकाउंट नंबर और UAN लिखा होता है. अगर आपको यह नहीं पता कि आपकी कंपनी पीएफ काटती है या नहीं तो आप ईपीएफओ की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन करके आसानी से पता कर सकते हैं. इसके लिए आपको UAN की जरूरत होगी और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिये अपने पीएफ खाते का पासबुक खोलकर जमा की गई राशि को देख सकते हैं.
हर कंपनी अपने कर्मचारी को सैलरी स्लिप देती है, जिस पर आपका पीएफ अकाउंट नंबर और UAN लिखा होता है. अगर आपको यह नहीं पता कि आपकी कंपनी पीएफ काटती है या नहीं तो आप ईपीएफओ की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन करके आसानी से पता कर सकते हैं. इसके लिए आपको UAN की जरूरत होगी और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिये अपने पीएफ खाते का पासबुक खोलकर जमा की गई राशि को देख सकते हैं.
अगर कंपनी न जमा करे पैसे तो क्या करें
आपको यह जानना जरूरी है कि अगर महीने की 15 तारीख से पहले कंपनी को आपके पीएफ के लिए काटे गए पैसों को खाते में जमा करना जरूरी होता है. मसलन, सितंबर महीने का पैसा आपकी कंपनी को 15 अक्टूबर से पहले जमा करना जरूरी होगा.
अगर कोई कंपनी ऐसा नहीं करती है तो आप उसकी शिकायत कर सकते हैं. शिकायत सही पाए जाने पर कंपनी पर जुर्माना लगाया जा सकता है.
आपको यह जानना जरूरी है कि अगर महीने की 15 तारीख से पहले कंपनी को आपके पीएफ के लिए काटे गए पैसों को खाते में जमा करना जरूरी होता है. मसलन, सितंबर महीने का पैसा आपकी कंपनी को 15 अक्टूबर से पहले जमा करना जरूरी होगा.
अगर कोई कंपनी ऐसा नहीं करती है तो आप उसकी शिकायत कर सकते हैं. शिकायत सही पाए जाने पर कंपनी पर जुर्माना लगाया जा सकता है.
कैसे करें कंपनी की शिकायत
- सबसे पहले ईपीएफओ के ऑफिशियल पोर्टल EPFiGMS को खोलें.
- पोर्टल पर Register Grievance ऑप्शन खोलें और PF Member का विकल्प चुनें.
- इसके बाद अपना UAN, मोबाइल नंबर सहित अन्य डिटेल भरें.
- शिकायत के कॉलम में लिखें कि आपका पीएफ कंपनी ने काटा लेकिन उसे ईपीएफ खाते में जमा नहीं किया.
- सबूत के तौर पर आपको सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट अथवा पासबुक की कॉपी लगानी होगी.
- इसके बाद आपकी शिकायत दर्ज हो जाएगी और कम्पलेंट नंबर मिल जाएगी. इस नंबर से आप अपनी शिकायत का स्टेटस चेक कर सकते हैं.



