राजनांदगांव। महारानी लक्ष्मी बाई कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला राजनांदगांव में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (श्रम न्यायालय) अमित जिन्दल ने छात्राओं और उपस्थित लोगों को कानून की जानकारी देते हुए बताया कि आज महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, लेकिन समाज में कभी-कभी महिलाओं को टोनही के नाम से प्रताड़ित करने के मामले सामने आते हैं।
न्यायाधीश अमित जिन्दल ने टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के विभिन्न कड़े प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी:
धारा 4 (पहचान करने पर दण्ड): यदि किसी व्यक्ति की पहचान टोनही के रूप में की जाती है, भले ही उसे कोई शारीरिक या मानसिक क्षति न पहुँचाई गई हो, तो केवल पहचान करने मात्र पर ही अपराधी को 3 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
धारा 5 (प्रताड़ना पर दण्ड): यदि किसी महिला को टोनही के नाम पर शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, तो अपराधी को 5 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा जुर्माने से दण्डित करने का प्रावधान है।
धारा 6 (झाड़-फूँक या असर समाप्त करने का दावा): यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि वह किसी महिला पर से टोनही का असर समाप्त कर सकता है या झाड़-फूँक का दावा करता है, तो उसे 5 वर्ष तक का कठोर कारावास और जुर्माना हो सकता है।
धारा 7 (तंत्र-मंत्र से नुकसान का दावा): कोई व्यक्ति यदि यह दावा करे कि वह जादू-टोना या कथित तांत्रिक शक्ति से किसी को नुकसान पहुँचा सकता है, तो धारा 7 के तहत उसे 1 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
धारा 8 (अपराध का प्रयास): इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध करने के प्रयास (अटेंप्ट) के लिए भी मूल अपराध जैसा ही दण्ड निर्धारित किया गया है।
न्यायाधीश जिन्दल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किया गया अपराध ‘भारतीय न्याय संहिता 2023’ (BNS) के दायरे में भी आता है, तो अधिनियम की धारा 3 के अनुसार अपराधी का विचारण (ट्रायल) दोनों कानूनों के तहत एक साथ किया जाएगा।



