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गर्मी व उमस से फसलों में कीट प्रकोप, लोगों के सेहत पर भी बुरा असर

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राजनांदगांव (दावा)। मौसम में लगातार आ रहे उतार -चढ़ाव के कारण तेज गर्मी व उमस बढ़ गई है। उमस व गर्मी की वजह से एक ओर धान के फसलों में कीट प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं मौसम के असर से लोगों की सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। दिन भर तेज धूप व गर्मी से लोग हाथ-पैर में दर्द, बेचैनी, सर्दी व टाईफाइट बुखार के चपेट में आ रहे है। गौरतलब है कि सावन माह औसत के हिसाब से सूखा रहा। शुरुआती दौर में अच्छी बारिश होने से धान के फसले लहराने लगी थी। इसके बाद बारिश पर ब्रेक लग गया। बारिश नहीं होने से तेज गर्मी व धूप पड़ रहा है। इसके अलावा मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। मौसम में उतार-चढ़़ाव से धान के फसलों में ब्लास्ट और तना छेदक बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। धान के फसलों में बीमारी का प्रकोप होने से किसानों की चिंता बढ़़ गई है।


ग्रोथ के बाद गर्मी व उमस से बीमारी
गौरतलब है कि इस साल जून के अंतिम पखवाड़े में व जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई थी। बारिश के बाद धान की बोनी व रोपाई का काम तेजी से हुआ था। इसके बाद सावन भर में औसत से बहुत कम बारिश हुई। सावन माह में बारिश थमने से धान के फसलों में ग्रोथ रुक गया है। भादो लगने के बाद अच्छी बारिश की उम्मीद है। बारिश थमने से फसलों की ग्रोथ रुक गई है। वहीं अब फसलों में तना छेदक व ब्लास्ट बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है।


बीमारी से किसान त्रस्त, दवाई का भी असर नहीं
मिली जानकारी के अनुसार धान की फसलों में इन दिनों कीट तना छेदक, ब्लास्ट की समस्या दिखाई दे रही है। पौधे में तना छेदक से नई पत्तियां मुरझा जाती है और वृद्धि वाले हिस्से मर जाते है। इसके अलावा पत्ती आवरण में छोटे- छोटे छेद बनाते है और बालियों में दाने नहीं भरते, इस स्थिति को ब्लाइट हेड या बालियों का सफेद पन्ना कहते है। फसलों में हो रहे बीमारी से किसान त्रस्त नजर आ रहे है। बताया जा रहा है कि मौसम अनुकूल नहीं होने से दवाई का छिडक़ाव करने के बाद भी इसका असर नहीं हो रहा है।


सप्ताहभर और बारिश नहीं होने पर अकाल की स्थिति
जिले में बारिश पर ब्रेक लग गया है। मिली जानकारी के अनुसार मानपुर-मोहला ब्लाक को छोड़ जिले के सात ब्लाक में सूखे की स्थिति निर्मित हो गई है। सप्ताहभर और बारिश नहीं होने से जिले में आकाल का छाया मंडराने की संभावना है। बारिश नहीं होने से खेत पूरी तरह सूख गई है। इससे फसलों खराब होने के कगार पर है। फिलहाल किसान फसलों में कीट प्रकोप से परेशानी में है। किसानों को अगले कुछ दिनों में बारिश होने की उम्मीद है।


सेहत का रखे ध्यान, खान-पान रखे सात्विक
वहीं मौसम की वजह से लोगों की सेहत पर भी विपरीत असर पड़ रह है। वर्तमान में कोरोना संक्रमण का खतरा चल रहा है। इसके चलते लोग इलाज व जांच कराने से भी कतरा रहे है। मौसम की वजह से लोग सर्दी, बुखार, हाथपैर में दर्द, बेचैनी सहित अन्य बीमारी के चपेट में आ रहे है। डॉक्टरों द्वारा ऐसे मौसम में लोगों को खान-पान में ध्यान देने व बाहरी खाद्य समाग्रियों से परहेज करने की सलाह दे रहे है। वहीं ऐसे मौसम में ठंडा पेय पदार्थ और बासी भोजन बीमारी को न्योता दे सकते है।


रोकथाम के लिए कर सकते है यह उपाय
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि तनाछेदक में प्रारंभिक अवस्था में जैविक नियंत्रण हेतु फेरोमोन ट्रैप तथा ल्योर (स्किरपोपैगा इंसर्तुलस) 40-50 मीटर की दूरी पर 5 नग/एकड़ खेत में लगाना चाहिए व तनाछेदक का प्रकोप अधिक होने पर कार्टप हाईड्रोक्लोराइड 8 किग्रा/ एकड़ तथा गंगई कीट की समस्या आने पर प्रिपरोनिल 5 एससी 500 एमएल/एकड़ की दर से छिडक़ाव किया जाए।

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