धान खरीदी पर विलंब से किसान परेशान
धान का कटोरा कहे जाने वाले हमारे राज्य छत्तीसगढ़ में प्रति वर्ष कि भांति इस वर्ष भी धान का बम्पर उत्पादन हुआ है इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए लगभग चौबीस लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब ढाई लाख अधिक है। वहीं पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 48 हजार हेक्टेयर खेती का रकबा भी बढ़ा है. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है जब लक्ष्य का निर्धारण हो चूका है तो सरकार को खरीदी की तिथि घोषित करने में इतना पसीना क्यों छुट रहा है. केंद्र सरकार 105 लाख टन में से 61.65 लाख टन चावल लेने के लिए सहमति के निर्णय का स्वागत करते हुए प्रदेश सरकार को अब मिथ्या प्रलाप से बाज आकर किसानो के हित में ईमानदारी से काम करना चाहिए.
भाजपा प्रवक्ता श्री शर्मा ने बताया की दिपावली का त्यौहार नजदीक होने कि वजह से किसान खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर हो गए है, किसानो के सामने कटाई मिंजाई के अलावा अन्य खर्चो को तत्काल पूरा करना अवश्य है पर सरकार की तिथि को लेकर अनिश्चितता से बिचौलियों के हौसले बुलंद है किसान अपना उत्पादन औने पौने दर पर बेच रहे है धान का उचित दाम ना मिलने से किसान कर्ज लेने को मजबूर हो रहे है.
श्री शर्मा ने आगे कहा कि खरीदी शुरू होने से पहले कुछ जिलो के सहकारी समितियों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है. दो साल से सोसायटी को नुकसान होने की बात कह रहे हैं. वहीं पांच सूत्रीय मांग पूरी नहीं होने पर धान खरीदी का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं. जिससे जग जाहिर है हर मोर्चे पर विफल कांग्रेस सरकार सिर्फ ठगने का कार्य कर रही है. लोकलुभावन घोषणा पत्र बनाते समय कांग्रेस ने सिर्फ सत्ता का लालच किया, वादे पुरे करने के लिए राजस्व कि प्राप्ति कहाँ से होगी इस पर विचार करना भूल गयी जिसका परिणाम है कि सरकार रिजर्व बैंक से कर्ज पर कर्ज लिए जा रही है.
श्री शर्मा ने नसीहत देते हुए कहा कि उत्तरप्रदेश चुनाव में वोटो कि फसल काटने के लिए राज्य के खाजने से अपनी राजनीतिक स्वार्थ में जुटी सरकार किसानो की भी चिंता कर जल्द धान खरीदी की सरकारी तिथि घोषित करे व समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किसानो के हितो का ध्यान रखे.



