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सीजेआई सूर्यकांत की दो टूक के बाद भी बंद रही दिल्ली मेट्रो, अब सुप्रीम कोर्ट रविवार को करेगा स्पेशल सुनवाई

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राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के बीच मेट्रो और रेल सेवाएं बंद किए जाने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत चिंतित थे. 09 अक्टूबर की सुनवाई में उन्होंने साफ निर्देश दिए थे. इसके बावजूद, 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों को बंद रखा गया. इस वजह से लाखों मुसाफिरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट रविवार को छुट्टी के दिन स्पेशल सुनवाई करने जा रहा है. अदालत ने अवमानना याचिका पर तत्काल संज्ञान लिया है. इस याचिका में आरोप है कि प्रशासन ने कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया. जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की दो जजों की बेंच इस गंभीर मामले पर सुनवाई करेगी. अदालत यह परखेगी कि क्या अधिकारियों ने कानून की सीमा लांघी है.
सुप्रीम कोर्ट ने रविवार की छुट्टी में क्यों बुलाई स्पेशल बेंच?
एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने शीर्ष अदालत में कंटेम्प्ट पिटीशन दायर की है. याचिका में कहा गया कि पुलिस और प्रशासन ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह ठप कर दिया. इससे पहले शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सख्त रुख अपनाया था. कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षा के नाम पर आम जनता को बंधक नहीं बनाया जा सकता. इसके बावजूद शनिवार को पूरे दिन मेट्रो सेवाएं बाधित रहीं. इसलिए शीर्ष अदालत ने रविवार को ही विशेष सुनवाई करने का फैसला किया.
प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर अलग से दायर हुई अर्जी
स्पेशल बेंच केवल मेट्रो बंदी पर ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों पर भी सुनवाई करेगी.शनिवार को जंतर मंतर जा रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. इसके खिलाफ सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने हेबियस कॉर्पस याचिका लगाई है. इस याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने बिना कानूनी आधार के लोगों को डिटेन किया. अदालत रविवार को दोनों मामलों पर एक साथ विचार करेगी.