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रायपुर-लखनादौन इकोनॉमिक कॉरिडोर की डीपीआर तैयार : डोंगरगढ़ को जोडऩे 4-लेन लिंक रोड की उठी मांग…

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19,500 करोड़ की लागत से बनेगा 310 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, तकनीकी कारणों से मुख्य रूट से बाहर हुआ धर्मनगरी का क्षेत्र

डोंगरगढ़ (दावा)। रायपुर-लखनादौन इकोनॉमिक कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा तैयार कर ली गई है। लगभग 310 किमी लंबा यह सिक्स-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे लगभग 19,500 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा। यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के कुम्हारी (रायपुर) से शुरू होकर धमधा, खैरागढ़, लांझी, रजेगांव, बालाघाट और बरघाट होते हुए मध्य प्रदेश के लखनादौन में नेशनल हाईवे हृ॥-44 से जुड़ेगा। इसके बनने से रायपुर से जबलपुर का सफर 4 से 4.5 घंटे और रायपुर से दिल्ली का सफर 14 से 16 घंटे में पूरा होने का अनुमान है।

डोंगरगढ़ को रूट में क्यों नहीं लिया गया?
एनएचएआई अधिकारियों और तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार डोंगरगढ़ को इस रूट में शामिल न करने के पीछे 4 मुख्य भौगोलिक और तकनीकी कारण हैं। रायपुर से धमधा-खैरागढ़ होते हुए सीधा रूट सबसे छोटा रहता है। डोंगरगढ़ की ओर मोडऩे पर एक्सप्रेसवे की लंबाई और यात्रा समय दोनों बढ़ जाता। डोंगरगढ़ का इलाका चंद्रगिरी पहाडिय़ों और घाट सेक्शन से घिरा है। 100-120 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड के लिए समतल जमीन जरूरी है। जिससे निर्माण लागत बहुत बढ़ जाती। एनएचएआई ने 3 विकल्पों में से उसी रूट को चुना जिसमें घने जंगल और वन्यजीव गलियारे कम से कम आएं। डोंगरगढ़ का सीमावर्ती क्षेत्र घने वनों से घिरा होने से पर्यावरण मंजूरी में अड़चन थी। खैरागढ़ को रूट में लेने से राजनांदगांव-कवर्धा का संतुलन बना रहता है, जबकि डोंगरगढ़ पहले से ही हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग और एनएच 53 से जुड़ा है। अब डोंगरगढ़ के लिए क्या विकल्प है?राज्य सरकार द्वारा एनएचएआई और केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा सकता है। डीपीआर तैयार होने और 2027 से निर्माण शुरू होने की संभावना के बीच स्थानीय नागरिकों और पर्यटन से जुड़े लोगों ने स्पर रूट फीडर रोड की मांग उठाई है।उनका तर्क है कि मां बमलेश्वरी धाम में सालाना लाखों श्रद्धालु आते हैं। यदि मुख्य एक्सप्रेसवे से डोंगरगढ़ जुड़ता है तो पर्यटन, होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

इसके लिए दो व्यावहारिक विकल्प सुझाए जा रहे हैं। एक्सप्रेसवे के खैरागढ़ इंटरचेंज से सीधे डोंगरगढ़ को 4-लेन फीडर रोड से जोड़ा जाए। मौजूदा एनएच 53 का ही उन्नयन कर मजबूत कनेक्टर बनाया जाए।विशेषज्ञों के अनुसार चूंकि यह प्रोजेक्ट अभी भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी के चरण में है, इसलिए राज्य सरकार (पीडब्ल्यूडी) के माध्यम से एनएचएआई और केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा सकता है। यह प्रस्ताव केंद्र की पीएम गतिशक्ति और प्रसाद योजना के भी अनुकूल है, जिसका उद्देश्य पर्यटन स्थलों को हाईवे से जोडऩा है।स्थानीय नागरिक अब छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी, मुख्यमंत्री कार्यालय और रायपुर स्थित एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय को ट्रैफिक और टूरिज्म डेटा के साथ एक तकनीकी प्रस्ताव सौंपने की तैयारी में हैं।

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