0 सचिव मुकेश बंसल के दौरे पर कबाड़ रूम को बना दिया था कार्यालय
0 निरीक्षण खत्म होते ही फिर लटका ताला
0 डोंगरगांव, छुरिया, खुज्जी समेत कई क्षेत्रों में व्यवस्था भगवान भरोसे
0 आधिकारिक पोर्टल पर फोन नंबर तक अपडेट नहीं
डोंगरगांव (दावा)। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मैदानी दफ्तरों में पदस्थ उपयंत्रियों की लापरवाही और मनमानी चरम पर पहुंच चुकी है. जिले के महत्वपूर्ण मुख्यालयों डोंगरगांव, छुरिया, खुज्जी, टप्पा और कुमरदा में उपयंत्री नियमित रूप से मुख्यालय से नदारद रहते हैं और न ही मुख्यालय में उनका निवास है। स्थिति यह है कि जनता से जुड़े निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों से पूरी तरह गायब हैं। वहीं उच्चाधिकारियों के दौरों पर महज लीपापोती कर व्यवस्था को दुरुस्त दिखाने का खेल चल रहा है।
सचिव के दौरे पर खुला आनन-फानन दफ्तर, जाते ही लगा ताला
विभागीय कार्यशैली का ताजा उदाहरण डोंगरगांव विश्राम गृह परिसर में देखने को मिला। हाल ही में पीडब्ल्यूडी विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल (आईएएस) के डोंगरगांव आगमन की सूचना मिलते ही स्थानीय अमले में हडक़ंप मच गया। सचिव की नाराजगी से बचने के लिए रेस्ट हाउस के पीछे स्थित एक पुराने कबाड़ रूम की रातों-रात सफाई कराई गई और आनन-फानन में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के कार्यालय का फलेक्स/बैनर टांग दिया गया। हैरानी की बात यह है कि उच्चाधिकारी के वापस लौटते ही इस तथाकथित दपतर के दरवाजे पर दोबारा ताला जड़ दिया गया। जो आज भी उसी हाल में बंद पड़ा है।
मुख्यालय में नहीं रहते अधिकारी/कर्मचारी
निरीक्षण के दौरान सचिव बंसल ने परिसर में फैली गंदगी और जर्जर भवन को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी. उनके जाने के बाद आनन-फानन में जर्जर हिस्से को तोडक़र मलबा हटाया गया, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी हुई है. उपयंत्रियों के मुख्यालय में उपस्थित न रहने के कारण रेस्ट हाउस अब अराजक तत्वों और बाहरी लोगों का सुरक्षित डेरा बन गया है। जिससे परिसर में तैनात चतुर्थ श्रेणी और छोटे कर्मचारी खासे त्रस्त हैं।
मोहड़ में नया विश्राम गृह, पुराने परिसर में एसडीओ कार्यालय शिफट करने की तैयारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार मोहड़ में नया रेस्ट हाउस बनकर तैयार होने के बाद अब डोंगरगांव के इस पुराने विश्राम गृह को विभागीय कार्यालय में तब्दील करने की योजना है। वर्तमान में जिला मुख्यालय राजनांदगांव में विभाग के दो कार्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से अनुविभागीय अधिकारी उपसंभाग क्रमांक-2 को डोंगरगांव स्थानांतरित करने की प्राथमिक तैयारी पूरी कर ली गई है, ताकि मैदानी स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा सके।
डिजिटल युग में भी लापता संपर्क सूत्र
एक तरफ शासन स्तर पर पारदर्शी प्रशासन और ई-गवर्नेंस के दावे किए जाते हैं। वहीं लोक निर्माण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पोर्टल पर फील्ड में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों के संपर्क नंबर तक अपडेट नहीं किए गए हैं। ऐसे में आम जनता और जनप्रतिनिधियों के लिए क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क साधना लगभग नामुमकिन बना हुआ है।




