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पीडब्ल्यूडी के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को हटाने का विरोध, ठेका प्रथा के खिलाफ आक्रोश

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० 2022 से कार्यरत कर्मियों को थमाया नोटिस, सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
० अधिकारियों से चर्चा के बाद समाधान न निकलने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

राजनांदगांव (दावा)। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में वर्ष 2022 से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों पर सेवा समाप्ति की गाज गिर गई है। विभाग द्वारा कर्मचारियों को अचानक नोटिस देकर कार्यमुक्त करने और उनके स्थान पर ठेका प्रथा (आउटसोर्सिंग) के जरिए नई भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस निर्णय के विरोध में कर्मचारियों ने लामबंद होकर विभाग और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराया।
वर्षों की सेवा के बाद अचानक नोटिस से रोजी-रोटी का संकट
प्रदर्शन कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मियों का कहना है कि वे वर्ष 2022 से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ पीडब्ल्यूडी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब अचानक बिना किसी ठोस आधार के उन्हें सेवा से बाहर करने का नोटिस थमा दिया गया है। जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग वर्षों से कार्य कर रहे अनुभवी कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाकर ठेका प्रथा को बढ़ावा दे रहा है। जो सीधे तौर पर श्रमिकों के अधिकारों का हनन और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
अधिकारियों से करेंगे चर्चा, मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
नाराज कर्मचारियों ने दो-टूक कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने बताया कि इस अन्यायपूर्ण फैसले को लेकर वे कल विभागीय उच्चाधिकारियों से मुलाकात करेंगे और नोटिस वापस लेकर उन्हें सेवा में यथावत बनाए रखने की मांग रखेंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बातचीत के माध्यम से सकारात्मक समाधान नहीं निकला और उन्हें हटाने का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इसके बाद वे काम बंद कर चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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