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शासन द्वारा गुरु रविदास सम्मान नहीं देने से रविदास समाज में आक्रोश…

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18 लाख की आबादी वाले समाज ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल
राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गुरु रविदास के नाम पर सम्मान नहीं देने से रविदास समाज में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। रविदास समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. के. एल. टांडेकर कहा कि गुरु रविदास जी के नाम पर सम्मान की घोषणा कर शासन द्वारा समाज को उम्मीद दिखाई गई, लेकिन इस वर्ष दिए जाने वाले राज्य अलंकरण में संत रविदास के नाम का पुरस्कार कहीं भी शामिल नहीं किया जा। डॉ. टांडेकर ने चयन प्रक्रिया ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए समरसता की बात करने वाली सरकार से जवाब मांगा है। बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्योत्सव 2026 के अवसर पर पहली बार घोषित किए गए संत शिरोमणि गुरु रविदास सम्मान को लेकर रविदास समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज के लोगों ने पुरस्कार के चयन को लेकर सवाल उठाते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लगभग 18 लाख की आबादी वाले रविदास समाज की भावनाओं की अनदेखी बताया है।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी केवल एक महापुरुष नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, भाईचारे, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय के महान प्रतीक हैं। उनके नाम पर राज्य स्तरीय सम्मान शुरू किए जाने की घोषणा से रविदास समाज में उम्मीद जगी थी कि समाज के प्रतिभाशाली, कर्मठ और सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करने वाले लोगों को उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान मिलेगा। राज्य शासन द्वारा घोषित पुरस्कार सूची में बालोद जिले के जगदीश प्रसाद देशमुख का नाम सामने आने के बाद समाज में चयन प्रक्रिया को लेकर असंतोष उत्पन्न हुआ है। समाज के लोगों का आरोप है कि गुरु रविदास जी के नाम से स्थापित सम्मान में रविदास समाज की भावनाओं, सहभागिता और प्रतिनिधित्व को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

डॉ. टांडेकर ने समाज की ओर से कहा कि जब छत्तीसगढ़ में रविदास समाज की इतनी बड़ी आबादी है, तो गुरु रविदास जी के नाम पर स्थापित सम्मान के चयन में समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा क्यों नहीं की गई? चयन के लिए क्या मापदंड निर्धारित किए गए थे? चयन समिति में समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था या नहीं? सरकार को इन सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए। रविदास समाज के लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार सामाजिक समरसता, समानता और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गुरु रविदास जी के नाम पर दिए जाने वाले सम्मान को लेकर समाज के भीतर असंतोष पैदा होना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। समाज ने कहा कि केवल महापुरुषों के नाम पर पुरस्कार शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। उनके विचारों, आदर्शों और उस समाज की भावनाओं का भी सम्मान होना चाहिए, जिनके संघर्ष और सामाजिक चेतना से उन महापुरुषों की विचारधारा आज भी जीवित है।रविदास समाज की मांग है कि सरकार संत रविदास सम्मान की चयन प्रक्रिया और निर्धारित मापदंडों को सार्वजनिक करें। साथ ही समाज की आपत्तियों और भावनाओं को गंभीरता से लेते हुए इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दे।

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