हफ्तों तक फाइलें अटकाने और काम न करने की चेतावनी देने का आरोप
राजनांदगांव । जिला परिवहन विभाग में नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) से जुड़े तकनीकी कार्यों और फाइलों के निपटारे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एनआईसी प्रोग्रामर कुंदन तिवारी की कार्यशैली और कथित मनमाने व्यवहार को लेकर संबंधित पक्षों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि सामान्य व जरूरी तकनीकी कार्यों के लिए भी कई-कई हफ्तों तक चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे शासकीय कामकाज की गति प्रभावित हो रही है। मामले में सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया है कि जब कोई काम की प्रगति जानने या फॉलोअप करने के लिए संपर्क करता है, तो कथित तौर पर उन्हें दो टूक कह दिया जाता है कि ‘बार-बार फॉलोअप करोगे तो काम ही नहीं करूंगा।’ इस प्रकार की कार्यशैली से परेशान लोगों का कहना है कि संबंधित प्रोग्रामर का रवैया ऐसा रहता है मानो उनके सामने किसी पद, प्रोटोकॉल या शासकीय दायित्व की कोई अहमियत ही न हो।
उनके कथित ऊंचे तेवर और असंवेदनशील रुख को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी कानाफूसी तेज हो गई है। इस पूरे प्रकरण ने परिवहन विभाग की सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही और कार्य संस्कृति पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। आखिर जनता और विभागों के काम को अपनी मर्जी से अटकाने या रोकने का अधिकार किसे है? साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि संबंधित प्रोग्रामर की नियुक्ति, संविदा अथवा सेवा शर्तें क्या हैं और उनकी सीधी जवाबदेही किस उच्चाधिकारी के प्रति तय है। शासकीय दफ्तरों में सहयोग, पारदर्शिता और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है, न कि अपने ही वाजिब काम के लिए दुर्व्यवहार सहने की। कार्यों में अनावश्यक लेटलतीफी और कथित दुर्व्यवहार के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब जिला प्रशासन व एआरटीओ अनिल भगत से इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा और ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है।




