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सफाई करने गये जेसीबी मशीन से पाइप लाइन क्षतिग्रस्त, पानी की किल्लत झेल रहा जिला हास्पीटल

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राजनांदगांव (दावा)। जिला चिकित्सालय परिसर स्थित 100 बिस्तर महिला एवं शिशु अस्पताल में लिफ्ट बंद होने तथा साफ-सफाई की अभाव के संबंध में दैनिक दावा में समाचार प्रकाशन के बाद निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे द्वारा साफ-सफाई को लेकर प्रबंधन की जमकर खिंचाई की गई थी। इसके बाद सफाई के लिए हास्पीटल पहुंची निगम की जेसीबी द्वारा सफाई करते-करते पानी के पाइप लाइन को ही क्षतिग्रस्त कर दिया जिससे जिला चिकित्सालय में जल संकट की स्थिति बन आई। आलम यह रहा कि मरीजों के नहाने-धोने व बाथरूम जाने तक के लिए पानी की उपलब्धता नहीं हो पाई, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बता दें कि हासपीटल में वार्डो के आसपास मे भी कहीं पेयजल की व्यवस्था नहीं है। नगर निगम द्वारा हास्पीटल प्रवेश द्वार के सामने वाटर कूलर मशीन लगवाया है जो अपनी स्थापना काल से बंद पड़ा हुआ है। इसे आज तक सुधारा नहीं जा सका। अस्पताल से भर्ती मरीजों का कहना है कि पानी नहीं होने के चलते वे भीषण गर्मी में भी दो-तीन दिन तक नहीं नहा पाते। बाथरुम में पर्याप्त पानी नहीं होने से निस्तारी के लिए कठिनाईयां हो रही है। सुबह बाथरूम जाने के लिए पानी नहीं रहता। 10-11 बजे जब टैंकर से पानी आता है, तब थोड़ी बहुत निस्तारी हो पाती है।
पानी की किल्लत से जूझ रहा हास्पीटल
बता दें कि पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी की किल्लत झेल जिला चिकित्सालय में भीषण गर्मी में पंखे-कूलर भी नहीं चल पा रहे हैं। हास्पीटल में कूलर तो लगे हैं लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। कूलर के लिए पानी नहीं होने से मरीजों को पंखे के गर्म हवा के बीच रहना पड़ रहा है। यहां ओपीडी में आने वाले मरीजों के बैठने की जगह में पंखे-कूलर तक नहीं हैं। ब्लड, यूरिन आदि जांच कराने के लिए वेट करने वाले मरीज व उनके परिजनों को बगैर पंखे, कूलर के गर्म हवाओं को झेलते बैठना पड़ता है।
डॉक्टरों की कमी
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। सर्जन भी सिर्फ एक है। बच्चों के डॉक्टर सहित गायनिक ओपीडी में आजकल डॉक्टर नदारत रहते हैं। इसमें गायनिक ओपीडी क्रमांक 3 तथा शिशु रोग के कमरे में आज 2 मई की शाम से ताला लगा रहा। इससे पता चलता है कि डॉक्टर अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं है। डाक्टरों का इंतजार करते मरीज अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर घंटों बैठे रहते हैं। उन्हें बताने के लिए नर्स भी नहीं रहती है कि डॉक्टर आएंगे या नहीं।
बताते चलें कि नवपदस्थ कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने कुछ दिन पहले ही जिला अस्पताल का जायजा लेकर डॉक्टरों को और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो, समय पर डॉक्टर उपस्थित हो, लेकिन उक्त निर्देश का कुछ भी असर होते नहीं दिख पा रहा।

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