तहसील कार्यालय के समीप हो रहा था स्टॉक
डोंगरगांव (दावा)। क्षेत्र में अवैध उत्खनन के मामले बेखौफ तरीके से बढ़ रहे है और विभागीय निष्क्रियता और कार्यवाही नहीं होने के चलते नदियों से बड़ी मात्रा में कीमती रेत की निकासी खुलेआम हो रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि रेत निकासी के इस अवैध कारोबार में नये-नये ट्रेक्टर और मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही बगैर लाइसेंस नवयुवा ड्राइवर इस अवैध काम में जुडक़र लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं. इसी का एक उदाहरण डोंगरगांव नगर पंचायत क्षेत्र से लगने वाले साल्हे घाट में देखने मिला. जहां शहर की सीमा से सटकर बहने वाली घुमरिया नदी से रेत की अवैध निकासी धड़ल्ले से हो रही है. अवैध निकासी की जानकारी होने के बाद मीडिया की टीम ने स्थानीय प्रशासन को सूचित किया और पूरी टीम ने बड़ी मात्रा में निकल चुके रेत का जायजा लिया. नदी से रेत निकालने के लिए बकायदा मुरूम डालकर रैम्प बनाया गया है और यहां से रेत निकालकर तहसील कार्यालय के समीप स्टॉक किया जा रहा है. इस दौरान साल्हे घाट में एक रेत से भरे सोल्ड ट्रेक्टर को पकड़ा गया, जो कि ग्राम मोहड़ निवासी भोलाराम देवांगन का बताया जा रहा है. जबकि इस कार्य में लगे लगभग 11 मजदूरों टीम के पहुंचने के बाद मौके से चलते बने. वही इस वाहन चालक राम विश्वकर्मा पिता रत्नू विश्वकर्मा उम्र 18 ने बताया कि यह सोल्ड ट्रेक्टर छ: माह पुरानी है और उनके पास भी लाइसेंस नहीं है. वाहन चालक ने बताया कि नदी से रेत निकालकर गैस गोदाम के समीप एक स्थानीय नेता के इशारे पर स्टॉक किया जा रहा है जबकि इस नेता से जानकारी लेने पर उन्होंने इस विषय में चर्चा पूरी नहीं होने की बात की. मौके पर पहुंची राजस्व की टीम और पुलिस ने ट्रेक्टर को जब्त कर डोंगरगांव थाने रवाना किया है और आगे कार्यवाही की जा रही है.
नदियों से रेत निकालना भी जरूरी
बता दें कि पूरा डोंगरगांव क्षेत्र शिवनाथ नदी और इसकी सहायक नदियों से घिरा हुआ है, जहां कीमती रेत बड़ी मात्रा में उपलब्ध है. हॉलाकि पूरे क्षेत्र में कहीं भी स्वीकृत रेत खदान उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में खुलेआम रेत की निकासी हो रही है. इस विषय पर सीएमओ विनम्र जेमा ने बताया कि उन्होंने अपनी सीमा क्षेत्र के दो खदानों को स्वीकृत करवाने के लिए जिला मुख्यालय में आवेदन किया है, किन्तु अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है. रेत और मुरूम खदानों में अवैध निकासी को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है, जबकि नदियों से रेत निकाला जाना भी आवश्यक है. अन्यथा लगातार कटाव के चलते नदी की चौड़ाई लगातार बढ़ते क्रम में रहेगी. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण रूदगांव में देखा जा सकता है, जहां वर्षों से रेत नहीं निकाले जाने के चलते नदी का पाट बढ़ रहा है.



