अखाड़ों में हुई अस्त्र-शस्त्र की पूजा, दिखाए गए पहलवानी व अखरा विद्या के करतब

राजनांदगांव (दवा)। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर राजनांदगांव अंचल में नागपंचमी का पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जहां किसानों ने अपनी फसलों के संरक्षक नाग देवता की बांबियों में दूध चढ़ाकर पूजा की, वहीं अन्य लोगों ने शिव मंदिरों में भगवान शिव के गले के हार नागराज की आराधना की।

धार्मिक अनुष्ठान और चौरसिया समाज की भव्य शोभायात्रा
श्रद्धालुओं ने नाग देवता पर दूब, पुष्प, तिलक-चंदन अर्पित कर और दुग्धाभिषेक कर अपने घर-परिवार की खुशहाली की कामना की। विशेष रूप से, पान (नागवल्ली) की खेती और व्यवसाय से जुड़े चौरसिया समाज ने नाग देवता को अपना इष्ट मानकर उनकी पूजा-अर्चना की। नागपंचमी के अवसर पर इस समाज द्वारा शहर में बाजे-गाजे के साथ एक भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। शहर के शिव मंदिरों में नाग देवता के पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी, जिससे पूरे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।

अस्त्र-शस्त्र पूजन और अखाड़ों में शौर्य प्रदर्शन
सनातन संस्कृति में नागों को भगवान शिव का अभिन्न अंग माना जाता है, और भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में भी नागों में स्वयं को शेषनाग बताया है। नागपंचमी के दिन लड़ाका जाति माने जाने वाले तक्षक नाग की पूजा का विधान है, जिसके साथ कुश्ती-दंगल और अखाड़ों का आयोजन कर बाहुबल व शौर्य का प्रदर्शन किया जाता है। नागपंचमी के दिन गांव-देहात सहित शहरों में भी कुश्ती-दंगल और अन्य खेलों का आयोजन किया गया। नाग देवता की पूजा के साथ-साथ विभिन्न वार्डों में स्थित अखाड़ों में शस्त्र पूजन किया गया। इन अखाड़ों में अस्त्र-शस्त्रों का संचालन और अखाड़ा विद्या के दांव-पेंच का प्रदर्शन किया गया। जिसे देखने के लिए कुश्ती-दंगल के प्रेमी, युवा और उस्ताद बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

आजाद हिंद अखाड़ा मोतीपुर में शस्त्र पूजा
मोतीपुर वार्ड नं. 8 के पार्षद मनोहर यादव ने बताया कि वार्ड के तालाब पार स्थित आजाद हिंद अखाड़ा में नागपंचमी के दिन अखाड़ा प्रेमी युवकों द्वारा अस्त्र-शस्त्रों की पूजा-अर्चना की गई। अखाड़ा के सदस्य और सेवानिवृत्त शिक्षक राजेंद्र यादव गुरुजी ने बताया कि इस अखाड़े के उस्ताद सेवाराम यादव और बब्बू उस्ताद हुआ करते थे। गुरुजी ने चिंता व्यक्त की कि आजकल अखाड़ा विद्या में युवाओं की रुचि कम हो गई है। उन्होंने बताया कि कुश्ती और अखाड़े के खेल में लगन और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। इस पारंपरिक खेल में आत्मरक्षा, अंग संचालन और अस्त्र-शस्त्र संचालन के गुर सिखाए जाते हैं। गुरुजी ने दुख व्यक्त किया कि आज के युवा केवल जिम में जाकर बॉडी बनाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। जिसके कारण यह पारंपरिक शौर्य की विद्या धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।
शहर में निकाली अखरा विद्या की शोभायात्रा
नागपंचमी के अवसर पर शहर के विभिन्न अखाड़ों में उस्तादों की उपस्थिति में जहां ककुश्ती के विभिन्न दांव-पेंच दिखाए गए। वहीं अस्त्र-शस्त्रों का पूजन कर उनका संचालन करना भी सिखाया गया। शहर के गंज चौक स्थित बजरंग अखाड़ा, नंदई क्षेत्र के बाली अखाड़ा, जयस्तंभ चौक के जय भवानी अखाड़ा आदि में भी नागपंचमी पर पूजा-अर्चना का माहौल रहा। इसी क्रम में, शहर के पंचरत्न अखाड़ा के सदस्यों ने अपने उस्ताद की उपस्थिति में अस्त्र-शस्त्रों का पूजन-अर्चन कर शहर में एक शोभायात्रा निकाली, जिसमें अखाड़े का शानदार प्रदर्शन किया गया। अखाड़े के युवकों ने अस्त्र-शस्त्रों का संचालन करते हुए एक से बढक़र एक करतब दिखाए, जिसे देखने के लिए मानव मंदिर चौक, जमात पारा फौव्वारा चौक और अन्य चौक-चौराहों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।



