कृषि भूमि की पांच डिसमिल से कम की नहीं हो रही रजिस्ट्री, कृषक परिवारों पर गिरा गाज
राजनांदगांव (दावा)। जिला पंजीयक कार्यालय में इन दिनों नेटवर्क समस्या के चलते रजिस्ट्री कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं किसी भी भूमि की रजिस्ट्री के लिए क्रेता और विक्रेता दोनों पक्ष का एक ही समय और स्थान में होने की अनिवार्यता के चलते भी रजिस्ट्री कार्यों में परेशानी खड़ी हो रही है। हालांकि बताया जा रहा है कि जिला पंजीयक कार्यालय में रोजाना 50 से 60 रजिस्ट्रियां हो रही है, लेकिन लोगों ने बताया कि नेटवर्क प्राब्लम व सर्वर डाउन की समस्या के चलते पंजीयन कार्य नहीं हो पा रहा है। सुबह से लेकर दिनभर लाईन लगानी पड़ती है। तब कहीं जाकर पंजीयन कार्य हो रहा है या फिर नहीं भी हो पा रहा है। इसके लिए पंजीयन कार्यालय का चक्कर लगाने की नौबत आ रही है। इस समस्या से लोग दो-चार तो हो ही रहे हैं। इसके साथ ही पांच डिसमिल वाले कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होने की भी समस्या लोगों को परेशानी का कारण बना हुआ है।
बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा जब से पांच डिसमिल से कम की रजिस्ट्री कराने पर रोक लगाई जाने की अधिसूचना जारी हुई है इसके किसानों को अपनी कृषि भूमि बेचने में खासी परेशानी हो रही। कम जमीन वाले किसानों के घर में कोई पारिवारिक बंटवारा होता है तो टूकड़ों में बंटी उक्त जमीन का मानो रजिस्ट्री हो ही नहीं सकता। जबकि डायवर्टेड भूमि का हो सकता है। बताया जाता है कि पांच एकड़ वाले कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक अवैध प्लाटिंग की बढ़ती समस्या को देखकर लगाया गया है। इस रोक के चलते किसानों को अपनी बटांकन की भूमि रजिस्ट्री कराने में समस्या खड़ी हो गई है। वे आपात स्थिति में यदि उन्हें पैसो की जरूरत पड़ती है तो वे चाह कर भी अपनी कृषि भूमि बेच नहीं पा रहे हैं। एक ही खसरा व बड़ा रकबा है तो उसका पंजीयन हो ही नहीं सकता। वहीं एक ही खसरा व एक ही रकबा हो तो रजिस्ट्री होने की बात कही जा रही है। टूकड़ों में रजिस्ट्री नहीं हो सकती। बताया जाता है कि उक्त रोक अवैध प्लाटिंग के चल रहे गोरख धंधे पर अंकुश लगाने के लिए किया गया है।
जमीन संबंधी सौदो के जानकार ने बताया कि शहर के पनेका-बांकल क्षेत्र में ले-आउट का रेट 15 सौ रुपए है, जबकि कृषि भूमि का 2 लाख रुपए है। इस तरह के कृषि भूमि के मूल्यांकन देखी जा रही असमानता और पांच डिसमिल से कम की कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होने के सरकारी फरमान से किसानों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जो सरकार के प्रति असंतोष का कारण बनते जा रहा है।



