Home छत्तीसगढ़ मिसेज ग्रैंड इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट में नांदगांव की लावण्या सेकंड रनर अप…

मिसेज ग्रैंड इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट में नांदगांव की लावण्या सेकंड रनर अप…

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दाम्पत्य जीवन में प्रवेश के बाद पहुंची मुंबई…
डॉ. सूर्यकांत मिश्रा
राजनांदगांव । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यांगून म्यांमार की राजधानी में आयोजित ” मिसेज ग्रैंड इंटरनेशनल 2025 ” प्रतियोगिता में संस्कारधानी में पली – बढ़ी डॉ. लावण्या (पांडे) गुप्ता ने सेकंड रनर अप होने का गौरव प्राप्त किया है । उक्त प्रतियोगिता जुलाई के द्वितीय सप्ताह में संपन्न हुई । पूरी दुनिया भर से पहुंचे प्रतिभागियों ने कॉन्टेस्ट में अपने टैलेंट का प्रदर्शन किया । लगभग 15 देशों के 40 प्रतिभागियों में डॉ.लावण्या ने भारतवर्ष का मान बढ़ाते हुए सेकंड रनर अप का खिताब अपने नाम कर लिया । डॉ.लावण्या ने देश की महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए यह सिद्ध कर दिखाया कि हौसला हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है ।


राजनांदगांव संस्कारधानी नगरी के शिक्षाविद आर बी पांडे की द्वितीय सुपुत्री डॉ. लावण्या ने मुंबई से म्यांमार तक की यात्रा में कितनी चुनौतियों का सामना किया होगा इसे वही समझ सकता है जो इस तरह की प्रतियोगिता का हिस्सा रहा हो । म्यांमार की राजधानी यांगून में जुलाई के दूसरे सप्ताह में संपन्न ” मिसेज ग्रैंड इंटरनेशनल 2025 प्रतियोगिता ” का हिस्सा बनने वाली लावण्या दाम्पत्य जीवन में भी सफल गृहिणी साबित हुई हैं । अपने दो बच्चों के पालन – पोषण में उन्होंने किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी ।

साथ ही मुंबई की व्यस्त जीवनशैली में अपने जीवन साथी का भरपूर साथ देते हुए लावण्या सुप्रसिद्ध फार्मा कंपनी ” लूपिन ” में फुल टाइम बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर की जवाबदारी भी बखूबी निभा रही हैं । अपने शरीर की चिंता करते हुए उसे फिट रखने के उद्देश्य से व्यस्तता के बीच समय प्रबंधन के माध्यम से विगत 15 वर्षों से जिम से भी जुड़ी हुई हैं ।

हमसे चर्चा के दौरान सेकंड रनर अप लावण्या बड़े ही सरल अंदाज में कहती हैं कि महिलाओं को समाज दोयम दर्जे का स्थान प्रदान करता है , जो किसी भी रूप में उचित नहीं है । इतनी बड़ी चुनौती को स्वीकार करने से पूर्व उनके मन में जीत के प्रति कितनी सकारात्मक सोच थी ? इस पर लावण्या कहती हैं कि गीता का उपदेश ” कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेसु कदाचना ” सभी को अपने जेहन में रखकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ चलना चाहिए ।

विजई उद्घोषणा के पश्चात सतरंगी मंच से भावुकता के साथ उन्होंने कहा कि यह ताज सिर्फ मेरा नहीं है ! यह हर उस कामकाजी मां का है जो सपनों को पंख लगाने की हिम्मत रखती है । समाज में महिला ही वह शख्स है जो हर किरदार निभा सकती है और प्रत्येक भूमिका में अपनी छाप छोड़ सकती है । उन्होंने अपनी जीत को अपने प्यारे वतन भारतवर्ष के साथ ही अपनी ससुराल से लेकर मायके तक ही सीमित नहीं रखा वरन अपनी कंपनी में बॉस के साथ सहकर्मियों के नाम कर दिया । उन्होंने कहा कि इन सभी का स्नेह और आशीर्वाद मेरे साथ बना रहा और मैं अपने लक्ष्य को भेद सकी ।
भारतवर्ष की शान बन चुकी लावण्या के विचारों ने सभासदों को करतल ध्वनि के लिए विवश कर दिया ।

उनका उद्बोधन जो मातृत्व से लेकर महिला सशक्तिकरण और घर के कामों में खट रही ग्रहणियों के लिए जिम की जरूरत पर उनके मुखारविंद से निकलते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा । उनकी जीत का सबसे प्रबल माध्यम उनके द्वारा प्रश्नोत्तर राउंड के साथ फिटनेस राउंड में दिए गए जवाब बनकर उभरे ।

उन्होंने कुछ इस तरह का परफॉर्मेंस जजेस के समक्ष कर दिखाया जो उनके आत्मविश्वास के साथ ही हर तरह की झिझक को अंगूठा दिखाता प्रतीत हुआ । यदि यह कहा जाए कि संस्कारधानी के संस्कारों से सुसज्जित लावण्या आज भारतवर्ष की लाखों महिलाओं तथा युवतियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

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