मामला – शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाले राहुलकसा में लूनेक वेल का काम और वर्टिकल टर्बाइन पंप,
चिंगारगढ़ के लिए निकाली गई थी निविदा में गड़बड़ी का
डोंगरगढ़ (दावा)। राज्य शासन द्वारा नगर पालिका परिषद डोंगरगढ़ को जल प्रदाय योजना अंतर्गत 2 करोड़ की स्वीकृति राशि के ई टेंडरिंग में छेड़छाड़ कर कम दर को बदलकर अधिक किए जाने की जानकारी प्रकाश में आई है। जिसकी शिकायत निविदा फार्म जमा करने वाले ठेकेदारों ने भी की है। गड़बड़ी करने वाले अधिकारी गड़बड़ी उजागर होने के बावजूद पालिका के चहते ठेकेदार को काम देने के लिए कृत संकल्पित दिखाई दे रहे हैं। ऐसा कर वे पालिका के कर्ताधर्ता जन प्रतिनिधि व नेताओं का कृपा पात्र बने रहना चाहते हैं। अन्य गंभीर मामलों की तरह इसे भी दबाने का प्रयास हर स्तर पर किया जा रहा है।
निविदा में शामिल ठेकेदारों द्वारा की गई आपत्ति में कहा गया है कि, ओरिजिनल कीमत का मूल्यांकन चार्ट स्वीकार नहीं किया गया था। ऐसा लगता है कि ओरिजिनल इवैल्यूएशन रिपोर्ट में बदलाव किया गया है, और पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से ऑनलाइन टेंडर में एक एडिटेड वर्शन अपलोड किया गया है। अधिकारियों से निवेदन किया गया है कि,कृपया ओरिजिनल प्राइस इवैल्यूएशन की एक कॉपी अटैच करें, जिसे ठेकेदार द्वारा 11 सितंबर 2025 को शाम 5:01 बजे डाउनलोड किया था।अधिकारियों के वेरिफिकेशन और रिकॉर्ड के लिए । ठेकेदारों ने अधिकारियों से पूछा है कि, किन हालात में डेटा बदला गया, और कानूनी नियमों और टेंडरिंग के नियमों के हिसाब से ही उसके इवैल्यूएशन को आगे बढ़ाएं।अगर इस मामले को ठीक से नहीं सुलझाया गया, तो हमें अपने अधिकारों की रक्षा करने और टेंडरिंग प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी पक्का करने के लिए ज़रूरी कानूनी कार्रवाई करनी पड़ेगी।
मामला उजागर होने के पश्चात कांग्रेस पार्षदों की चुप्पी भाजपा से मिली भगत की ओर इशारा कर रही है
पालिका की ओर से संपन्न किए जाने वाले लगभग सभी निर्माण कार्यों में व्यापक पैमाने में अनियमिताएं देखने – सुनने को मिलते आ रही है। किंतु देखा जाता है कि कांग्रेस शासन काल में भाजपा के पार्षद व भाजपा शासन काल में कांग्रेस के पार्षद एक दूसरे को समर्थन करते दिखाई देते आ रहे हैं। बहुत कम अवसर में देखने को मिलता है कि विरोधी पार्षद किसी निर्माण कार्य को लेकर विरोध करते हैं और उसे अंजाम तक पहुंचते हैं। यही कारण है कि पालिका के अधिकारी व जिम्मेदार जनप्रतिनिधि खुले हाथों से भ्रष्टाचार करने से पीछे नहीं हटते। ई-टेंडरिंग मामले में अपने चाहते ठेकेदार को काम देने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निविदा प्रक्रिया में सीधे तौर पर गड़बड़ी किए जाने की शिकायत निविदा में भाग लेने वाले ठेकेदारों द्वारा भी की गई। किंतु टेंडर को निरस्त करने के स्थान पर अपने चाहते ठेकेदार को वर्क आर्डर देने की तैयारी पालिका के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने विधायक से की शिकायत
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय राज चौहान ने ई-टेंडिंग में हुई गड़बड़ी को लेकर विधायक श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल से शिकायत की है। आगे देखना होगा कि, विधायक श्रीमती बघेल उपरोक्त शिकायत को किस स्तर पर आगे बढ़ती है।
छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी को सीएमओ द्वारा पत्र लिखकर मांगी गई जानकारी
मुख्य नगर पालिका अधिकारी खिलेंद्र भोई ने बताया कि पालिका की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार की नोडल एजेंसी ,छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी को निविदा में भाग लेने वाले ठेकेदारों द्वारा की गई आपत्ति के संबंध में जानकारी मांगी गई है। मौखिक रूप से दी गई जानकारी में उन्होंने ऐसी किसी गड़बड़ी से इनकार किया है। सोसाइटी की ओर से जवाबी पत्र आने के पश्चात निविदा की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा।
ई टेंडरिंग में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान
ई-टेंडरिंग में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें कानूनी और विभागीय दोनों तरह के उपाय शामिल हैं। प्रभावित पक्ष उच्च न्यायालय या अन्य संबंधित अदालतों में द्वेष, पक्षपात या मनमानी के आधार पर निविदा प्रक्रिया को चुनौती दे सकता है। साथ ही, प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से अधिकारी को निलंबित, दंडित या बर्खास्त भी किया जा सकता है।



